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प्लॉट के नाम पर 32.51 लाख हड़पने का आरोप

  • दोस्ती में दगा
  • पीड़ित ने दंपति के खिलाफ मामला कराया केस दर्ज

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),प्लॉट के नाम पर 32.51 लाख हड़पने का आरोप। शहर के झंवर रोड महावीरपुरम में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ जमीन खरीद फरोख्त को लेकर धोखाधड़ी हुई। आरोपी पीडि़त का परिचित और दोस्त बताया जाता है। इस बारे में पुलिस ने कोर्ट से मिले इस्तगासे पर अब दंपती के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच आरंभ की है।

आरोप है कि प्लॉट खरीदने के नाम पर कथित रूप से 32 लाख 51 हजार रुपये की धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाए गए। मामले में अब जांच एएसआई भीमसिंह कर रहे है।

सात लाख रुपये लेकर दूसरे को प्लॉट बेचने की बात 
कोर्ट से मिले इस्तगासे पर चौपासनी हाउसिंग बोर्ड पुलिस ने 406,झंवर रोड, महावीरपुरम नगर निवासी 36 वर्षीय प्रदीप शर्मा पुत्र श्रीकांत शर्मा की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज किया। रिपोर्ट में बताया है कि 5 ए, इनकम टैक्स कॉलोनी,पावटा सी रोड निवासी अभिनंदन रांका पुत्र सीध कुमार रांका से करीब 15 साल से मित्रता थी।

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आरोप है कि अभिनंदन ने संखेश्वर नगर,उचियारड़ा स्थित प्लॉट नंबर 219 बेचने का प्रस्ताव दिया। दोस्ती और भरोसे के चलते प्रदीप शर्मा ने विभिन्न किश्तों में करीब 7 लाख रुपये नकद दे दिए। रिपोर्ट में बताया गया है कि कई बार प्लॉट की रजिस्ट्री करवाने के लिए कहने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला। आरोप है कि गत 14 अप्रैल 2026 को व्हाट्सऐप संदेश के जरिए अभिनंदन ने उक्त प्लॉट किसी अन्य व्यक्ति को बेच देने की जानकारी दी। इसके बाद रकम लौटाने के बजाय दूसरा प्लॉट दिलाने का प्रस्ताव दिया गया।

प्लॉट 35 लाख में दिलाने का झांसा देकर रुपए हड़पने का आरोप 
परिवादी प्रदीप शर्मा ने रिपोर्ट में बताया है कि इसके बाद अभिनंदन रांका ने उसे जैन एन्क्लेव, बोरानाडा रोड स्थित प्लॉट नंबर 106 का सौदा बताया। इस प्लॉट की बाजार कीमत करीब 50 लाख रुपये बताकर उसे 35 लाख रुपये में दिलाने का भरोसा दिया। जिसके बाद अपने दोस्त अभिनंदन की बात पर भरोसा कर अलग-अलग माध्यमों से भुगतान करना शुरू कर दिया।

नकद भुगतान के साथ आरटीजीएस और अन्य डिजिटल माध्यमों से रकम दिए जाने का उल्लेख है। आरोप है कि प्लॉट के मूल दस्तावेज सौंपने और रजिस्ट्री करवाने का आश्वासन देकर भी लगातार रकम मांगी जाती रही।

रजिस्ट्री नहीं होने का आरोप 
रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि प्लॉट का पट्टा,आम मुख्त्यारनामा व बेचान नामा सहित दस्तावेज पीडि़त को दिए गए। इसके बाद भी रजिस्ट्री नहीं होने पर उसे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। आरोप है कि दस्तावेजों की जांच के दौरान उन्हें कूटरचित होने का संदेह हुआ और इस संबंध में दोनों से बात की गई।

आरोपी दंपति ने कथित तौर पर दस्तावेज फर्जी होने की बात स्वीकार करते हुए रकम लौटाने और रजिस्ट्री करवाने से इनकार कर दिया। हालांकि,इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और दस्तावेजों की विधिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

पीडि़त ने लिया था बैंक से ऋण 
आरोप है कि पीडि़त भुगतान के लिए एक्सिस बैंक से 30 लाख रुपये का ऋण लिया था। इस मामले में आर्थिक नुकसान के साथ बैंक ऋण चुकाने की जिम्मेदारी भी उसके सामने आने का उल्लेख किया गया है।