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झुग्गी झोपड़ी के बच्चों से मिली मनीषा

झुग्गी में रह रहे बच्चों की पीड़ा को नजदीक से देखा

जोधपुर,अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी व पूनम फाउंडेशन व ट्रस्ट सूरतगढ़ श्री गंगानगर की ब्रांड एम्बेसेडर मनीषा प्रजापत ने झुग्गी झोपड़ी के बच्चों को बिस्किट,चॉकलेटस बांटे। निःशुल्क शिक्षा अभियान जोधपुर जिला प्रभारी,पूनम फाउंडेशन ट्रस्ट की ब्रांड एम्बेसेडर मनीषा प्रजापत ने झुग्गी झोपड़ी के बच्चों को बिस्किट व चॉकलेटस का वितरण किया। उन बच्चों के साथ कुछ समय बिताते हुए उनकी झुग्गी झोपड़ी का निरक्षण किया और सभी बच्चों के निवास की जाँच कर ब्यौरा लिया।

वहाँ रहने वालों,बच्चों व उनके माता पिता से उनकी इच्छाओं,उम्मीदो व सपनो के बारे में बात की। पता चला कि यहां रह रहे लोगों का जीवनस्तर निम्न है। उन्होंने कहा कि देश की भावी पीढ़ी इस तरह का जीवन व्यतीत कर रहे है, उनको देखकर स्तब्ध रह गई, सहम सी गई। बच्चों से बातचीत करने पर पता चला कि इनकी उम्र तो समय के साथ बढ़ती जा रही है परन्तु शिक्षा का स्तर जीरो है।

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उन्होंने बताया कि वहां रह रहे लगभग 15 से 20 से बातचीत करने पर यह बात सामने आई की एक तरफ तो सरकार निःशुल्क शिक्षा अभियान का समर्थन करती है, गरीब बच्चों, परिवारों के मसीहा बनती है तो दूसरी ओर इन गरीब,असहाय बच्चों का कोई मसीहा नही है।

उन्होंने कहा कि इन परिवार के बच्चों के लिए कोई स्कूल नही,कोई अध्यापक नही,यहाँ तक कि इन बच्चों का सरकारी स्कूल में भी दाखिला होना था परन्तु वो भी नही हो सका क्योंकि उन बच्चों के परिवारों के कोई पहचान पत्र नही हैं और वे गरीब हैं। इसलिए उन्हें दाखिला नही दिया गया। बहुत बार तो इनके माता पिता को चोर अपराधी,लुटेरे समझे गए जो असल में लोहे,कबाड़ी का ठेला चलाकर अपने परिवार के लिए 2 वक्त की रोटी कमाते हैं।

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इन गरीब परिवार और इनके बच्चों को निम्न स्तर से भी कम स्तर पर आंका जाता है। कई बार एनजीओ ओर उनके सदस्य आये और 2,3 दिन बच्चों को थोड़ा बहुत पढ़ाई करवाकर अपने वीडियो,न्यूज़ पेपर की कटिंग आदि करके चले जाते हैं। झुग्गी झोपड़ी के परिवारो को अब ये लगने लगा है कि लोग उन्हें और उनके गरीबी का इस्तेमाल करने लगे हैं। कुछ तो महिलाएं ऐसी थी जिनको एक महिला होने पर भी शर्म आ रही थी। क्योंकि इनके आस पास एक भी शौचालय नही बना हुआ है जहाँ एक तरफ सरकार शौचालय का निर्माण करके स्वछ भारत का नारा लगाया वहीं दूसरी ओर कुछ जिलों में कुछ क्षेत्रों में ऐसे लोग है जो शौचालयो का पैसा वसूलते हैं। ओर इन जैसे गरीब बेसहारा परिवार और बच्चों के लिए कोई शौचालय नही है।

उन्होंने कहा कि सरकार और हमारी संस्था से अनुरोध करना चाहती हूं कि एक बार इन झुग्गी झोपड़ी के परिवार और गरीब बच्चों के बारे में बातचीत कर कोई ठोस कदम उठाकर स्वच्छ भारत की पहल पुनः करे और इन बच्चों के लिए एक निःशुल्क शिक्षा केन्द्र बनवाकर एक अध्यापक नियुक्त कर हमे दे, जिससे ये बच्चे भी पढ़ लिखकर इस देश का नव निर्माण करने में सहयोग कर सकें।

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