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हिंदी शब्दों का बढ़ाएं ज्ञान,जिज्ञासा का करें समाधान

शब्द संदर्भ:- (88) प्रारब्ध

लेखक – पार्थसारथि थपलियाल

जिज्ञासा
नरेश कुमार जानना चाहते हैं ‘प्रारब्ध’ शब्द का सही भाव क्या है?

समाधान

सनातन धर्म बहुत व्यापकता के साथ उसके अनुयायियों के साथ जुड़ा हुआ है। वह पूर्व जन्म में विश्वास रखता है। कर्म फल आदमी को भोगने ही होंगे। आतंक और शरीर दो अलग-अलग उपकरण हैं। मोटेतौर पर कहें कि एक मकान में एक दुकानदार आया। दुकान चलती रही। एक दिन किसी कारण से दुकान बंद हो गई। (कारण जो भी हो- दुकान नही चल पाई, बेचने के लिए सामान नही मिला, दुकान में चोरी हो गई, आग लग गई, या वह दुकानदार ने काम बदल दिया) व्यापारी के निकलते ही दुकान और दुकानदार का संबंध समाप्त। अतः जितनी देर दुकान चली उसका लेखा जोखा उस दुकान के नाम पर ही मन जाता है।

सनातन संस्कृति कर्म में विश्वास रखती है। इसलिए श्रीमद्भगवद्गीता में लिखा है- तेरा अधिकार कर्म में है, तू फल की इच्छा न कर। फल मैं दूंगा। यह कर्म फल ही भाग्य है। आदमी अच्छा करेगा तो उसके पुण्यकर्म बढ़ेंगे बुरा करेगा तो पाप कर्म बढ़ेंगे।

शास्त्रों में तीन प्रकार के कर्म बताये हुए हैं

(1) संचित कर्म (2) प्रारब्ध कर्म (3)क्रियमाण कर्म।

संचित कर्म वे हैं जिनका फल पूर्वजन्म में उपभोग नही किये जा सके थे, ये कर्म संचित रहते हैं अथवा एकत्र रहते हैं।

संचित कर्म में से कुछ भाग उस नए शरीर और आत्मा से बने इंसान के लिए ताकि उसका भाग्य निर्धारित हो सके। वह किस घर में जन्म लेगा, उसका जीवन कैसे शुरू होगा इत्यादि प्रारब्ध (भाग्य) का फल है।

क्रियमाण कर्म वह है जो कर्म हम वर्तमान समय मे कर रहे हैं। हम अपने आप अपने भाग्य निर्माता हैं। किसी अन्य को दोषी क्यों बनाएं। किसी को सतायेंगे, मारेंगे, अमानवीय व्यवहार करेंगे तो अच्छे भाग्य की कल्पना कैसे कर सकते हैं। मनुष्य अपने भाग्य स्वयं बनाता है या बिगाड़ता है। अच्छा करने वाले को अच्छी संगत मिलती है तो वह अच्छा रास्ता पकड़ता है। युधिष्ठिर को कृष्ण और दुर्योधन को शकुनि मिले, संगत का असर आप जानते हैं।
आप अपने भाग्य के निर्माता स्वयं हैं। जो उद्यमी व्यक्ति है उसका वरण लक्ष्मी करती है, आलसी अपने संचित कर्मफल को भी जल्दी खत्म कर देता है।

“यदि आप भी जानना चाहते हैं किसी शब्द की व्याख्या तो अपना प्रश्न “शब्द संदर्भ” में पूछ सकते हैं।”

>>> नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने प्लेसमेंट में बाजी मारी

 

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