राज्य सेवा अपीलेट अधिकरण में सदस्य की नियुक्ति प्रगति रपट पेश करने का आदेश
राजस्थान उच्च न्यायालय
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),राज्य सेवा अपीलेट अधिकरण में सदस्य की नियुक्ति प्रगति रपट पेश करने का आदेश। राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के न्यायाधीश उमा शंकर व्यास और न्यायाधीश चंद्र शेखर शर्मा ने राज्य उपभोक्ता आयोग और जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नई भर्ती नहीं होने तक उन्हें रिलीव नहीं कर कार्य पर यथावत रखने तथा सेवानिवृत्त हो चुके अध्यक्ष और सदस्यों को नियमानुसार निर्धारित आयु तक वापिस सेवा में लिए जाने और राज्य सेवा अपीलेट अधिकरण में सदस्य की नियुक्ति के न्यायालय द्वारा पारित विभिन्न आदेशों की पालना में 17 सितंबर तक पालना और प्रगति रपट पेश करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है अन्यथा खाद्य,नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलात के प्रमुख सचिव तथा कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को आगामी पेशी पर न्यायालय के समक्ष हाजिर होना होगा।
राजस्थान हाइकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका पर बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद पुरोहित,अधिवक्ता अनिल भंडारी,सुशील सोलंकी और दिनेश चौधरी ने कहा कि खंडपीठ ने गत 18 मार्च को पारित विस्तृत आदेश में राज्य सरकार को आदेश दिया कि राज्य उपभोक्ता और जिला उपभोक्ता आयोग में नई भर्ती नहीं होने तक कार्यरत अध्यक्ष और सदस्यों को रिलीव नहीं कर यथावत कार्य करने दिया जाए तथा जिन्हें रिलीव कर दिया गया है,उन्हें निर्धारित आयु तक पुन: नियुक्ति दी जाए।
अधिवक्ता पुरोहित और भंडारी ने कहा कि उपभोक्ता मामलात के प्रमुख सचिव उन्हीं अध्यक्ष और सदस्यों की सेवा विस्तार करने के आदेश जारी कर रहे है,जिन्होंने एकल पीठ के समक्ष रिट याचिका दायर की है।उन्होंने कहा कि यह खंडपीठ के आदेश की घोर अवहेलना है। अधिवक्ताओं ने कहा कि जोधपुर में राज्य सिविल सेवा अपीलेट अधिकरण में कार्यरत सदस्य की 31 जुलाई को मृत्यु हो जाने पर खंडपीठ ने राज्य सरकार को 5 अगस्त को आदेश दिया कि जल्द ही जोधपुर में सदस्य की भर्ती करें।
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उन्होंने कहा कि ऐसा ही आदेश जयपुर पीठ वास्ते वहां की खंडपीठ ने करते हुए मुख्य सचिव को 11 अगस्त को हाजिर होने का आदेश दिया तो आनन फानन में वहां आदेश कर दिए गए, लेकिन जोधपुर में नियुक्ति नहीं करने से रेट में न्यायिक कार्यवाही ठप हो गई है।उन्होंने कहा कि खंडपीठ के आदेशों की वास्तविक रूप से पालना नहीं करने पर दोनों ही विभागों के प्रमुख सचिव को हाजिर होने का आदेश दिया जाए।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने कहा कि आदेशों की पालना में उच्च स्तर पर कार्रवाई चल रही है सो कुछ समय और दिया जाए।
राजस्थान हाइकोर्ट की खंडपीठ के न्यायाधीश उमा शंकर व्यास और न्यायाधीश चंद्र शेखर शर्मा ने कहा कि खंडपीठ की ओर से 27 जनवरी, 24 फरवरी,18 मार्च और 5 अगस्त को विभिन्न आदेश पारित करने पर भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है सो आगामी पेशी तक आदेश की पालना में प्रगति और वास्तविक रपट पेश करें और नियुक्तियां नहीं किए जाने की दशा में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलात के प्रमुख सचिव तथा कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव को आगामी पेशी 17 सितंबर को न्यायालय के समक्ष हाजिर होने का निर्देश दिया।
