नाबालिग के पासपोर्ट के लिए पिता की सहमति जरूरी नहीं: हाईकोर्ट
- माता पिता के विवाद में नहीं रुकेगी बच्चे की पढ़ाई
- पासपोर्ट जारी करने के निर्देश
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),नाबालिग के पासपोर्ट के लिए पिता की सहमति जरूरी नहीं: हाईकोर्ट। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश अनूप कुमार ढंढ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि तलाकशुदा माता- पिता के बीच विवाद के कारण किसी नाबालिग बच्चे के शिक्षा के लिए विदेश जाने के अधिकार को केवल इसीलिए नहीं रोका जा सकता कि पासपोर्ट आवेदन पर पिता की सहमति या हस्ताक्षर नहीं हैं।
कोर्ट ने कहा कि बच्चे माता-पिता की संपत्ति नहीं,बल्कि कानून की नजर में स्वतंत्र व्यक्ति हैं। माता-पिता उनके अभिभावक हैं,मालिक नहीं। जस्टिस ढंढ ने 17 वर्षीय नाबालिग की मां के माध्यम से हाईकोर्ट में दायर याचिका स्वीकार करते हुए पासपोर्ट प्राधिकरण को उसका पासपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में नाबालिग की ओर से मांग की गई थी कि आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना चाहता है,लेकिन नाबालिग होने से पासपोर्ट प्राधिकरण ने पिता की सहमति के अभाव में पासपोर्ट जारी नहीं किया। नाबालिग के माता-पिता के बीच विवाह से जुड़ा विवाद हो गया था। उसकी मां की तलाक की याचिका कोर्ट में मंजूर होने के बाद 2022 में तलाक हो गया।
नवंबर से बदल जाएगा जोधपुर से जुड़ी 10 ट्रेनों के डिब्बों का गणित
इसके बाद से नाबालिग अपनी मां के साथ रह रहा था। उसके पिता ने उसकी कस्टडी और मिलने के लिए किसी तरह का कोर्ट में आवेदन नहीं किया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि बच्चे ने दसवीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की है और विदेश में पढ़ाई के लिए उसका चयन हुआ है। ऐसे में केवल इस तकनीकी आधार पर उसे विदेश जाने से रोकना उचित नहीं है कि पारिवारिक अदालत के आदेश में उसकी कस्टडी के संबंध में स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
कोर्ट ने माना कि जब पिता ने कस्टडी या मुलाकात का अधिकार मांगने के लिए कोई कदम नहीं उठाया तो बच्चे को पासपोर्ट के लिए उनकी सहमति लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 21 देता है अधिकार
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार में विदेश यात्रा का अधिकार भी शामिल है। इस अधिकार से किसी व्यक्ति को केवल कानून द्वारा निर्धारित न्याय संगत,निष्पक्ष और उचित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जा सकता है।
फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि पासपोर्ट प्राधिकरण नाबालिग के पासपोर्ट के लिए हर स्थिति में दोनों माता- पिता की सहमति पर जोर नहीं दे सकता। यदि किसी कारण से एक अभिभावक दूसरे की सहमति प्राप्त नहीं कर पा रहा है तो पासपोर्ट नियमों के तहत ऐनेक्सर सी में शपथपत्र देकर पासपोर्ट जारी किया जा सकता है।
