जबरन वसूली और सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में सह-अभियुक्त को जमानत
अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी में पूर्व विवाद,क्रॉस केस और पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने को बनाया गया प्रमुख आधार
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जबरन वसूली और सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण में सह-अभियुक्त को जमानत। सिणधरी थाना क्षेत्र के बहुचर्चित कथित जबरन वसूली,अपहरण एवं सामूहिक दुष्कर्म के प्रकरण में सह-अभियुक्त अशोक कुमार उर्फ आसू को न्यायालय से जमानत मिल गई। प्रकरण संख्या 112/2026 में पीडि़ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि उसे बहला- फुसलाकर घर से बाहर बुलाने के बाद अपहरण कर लिया गया तथा कई व्यक्तियों द्वारा अलग- अलग स्थानों पर ले जाकर उसके साथ कथित रूप से मारपीट, धमकी और सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
सेशन न्यायाधीश, बालोतरा ने उक्त प्रकरण में अभियुक्त अशोक की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट मोहसिन खान की बहस के आधारों को सुनने के बाद जमानत पर रिहा किया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार परिवादिया ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष द्वारा उसे दबाव में रखा गया तथा कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाकर कथित रूप से फर्जी साथ रहने संबंधी दस्तावेज तैयार करवाए गए।
दावेदार को 2.91 करोड़ से ज्यादा एक माह में अदा करने का आदेश
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 140(3),308(2),115 (2),70(1) एवं 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में अशोक कुमार सहित कई व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया था। आरोपी अशोक कुमार पुत्र रामाजी,निवासी इन्द्राणा की ओर से अधिवक्ता मोहसिन खान ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत जमानत आवेदन पेश किया।
उन्होंने न्यायालय के समक्ष मामले की पूरी पृष्ठभूमि रखते हुए पक्षकारों के बीच पूर्व विवाद,पूर्व न्यायिक कार्यवाही तथा क्रॉस केस के घटनाक्रम को प्रमुखता से रखा। बचाव पक्ष की ओर से राजस्थान उच्च न्यायालय में पूर्व में हुई कार्यवाही तथा आपराधिक रिट याचिका संख्या 2638/2026 में 15 जून 2026 को पारित आदेश का भी न्यायालय के समक्ष उल्लेख किया गया।
अधिवक्ता ने बताया कि अशोक कुमार के विरुद्ध पूर्व में कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज या लंबित नहीं बताया गया है। साथ ही,मामले में एक सह- अभियुक्त को पूर्व में जमानत का लाभ मिल चुका है।बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मामले के अनुसंधान एवं विचारण में समय लगने की संभावना है। ऐसे में आरोपी को लगातार न्यायिक अभिरक्षा में रखना उचित नहीं होगा। अधिवक्ता मोहसिन खान ने पूर्व विवाद, क्रॉस केस, पूर्व न्यायिक कार्यवाही तथा आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड के अभाव जैसे बिंदुओं को जमानत के महत्वपूर्ण आधार के रूप में प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के साथ केस डायरी का अवलोकन किया। न्यायालय ने मामले की समग्र परिस्थितियों, पूर्व न्यायिक कार्यवाही, सह-अभियुक्त को मिली जमानत तथा रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अशोक कुमार को जमानत का लाभ देना उचित माना। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जमानत के स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की जा रही है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी अशोक कुमार को जमानत प्रदान कर दी।
