‘सिंध,सिंधु और सिंधियत के पुनर्जागरण का दौर आएगा’
सिंधी समुदाय का विभाजन विभीषिका पर सेमिनार
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),’सिंध,सिंधु और सिंधियत के पुनर्जागरण का दौर आएगा’।भारत विभाजन विभीषिका की स्मृति में गुरुवार को सिंधी समुदाय द्वारा ‘1947 के बाद हमने क्या पाया और क्या खोया?’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद,नई दिल्ली एवं कला फाउंडेशन,जोधपुर के संयुक्त तत्वाधान में चौपासनी स्थित एआर एक्सीलेंसी में सम्पन्न हुआ।
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कार्यक्रम की मुख्य बातें
-वरिष्ठ लेखक गोबिंद करमचंदानी ने कहा कि विभाजन की पीड़ा और विस्थापन का संघर्ष नई पीढ़ी तक सिंधु संस्कृति पहुंचाने का माध्यम है।
-इंद्र टहिलियानी ने 8 वर्ष की उम्र में भोगी विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए विस्थापित सिंधियों की पीड़ा बयां की।
-लेखक तीर्थ डोडवाणी ने कहा कि भले ही घर- जमीन खोया,पर सिंधी समाज ने उद्यमशीलता, स्वावलम्बन और परमार्थ से वैश्विक पहचान बनाई। उन्होंने कहा बलोचिस्तान की तरह सिंध भी एक दिन आजादी की घोषणा करेगा।
-रमा असनानी,डॉ.मदन पुंजराज,महेश संतानी ने भविष्य की चुनौतियों पर विचार रखे।
संकल्प
सिंधी कल्चरल सोसायटी,सिंधी यूथ वेलफेयर सहित समाज के प्रतिनिधियों ने सिंधी भाषा और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि अपनी जिजीविषा के बल पर सिंध,सिंधु और सिंधियत के पुनर्जागरण का दौर लाएंगे।
कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों के माध्यम से शहीदों को याद किया गया। प्रस्तुति जेठानंद लालवानी, दिनेश मीरचंदानी,लालचंद खन्ना सहित अन्य कलाकारों ने दी।
कार्यक्रम का संचालन ललित कुमार खुशलानी ने किया। आभार कला फाउंडेशन सचिव नरेंद्र श्रीमाली ने व्यक्त किया। मार्गदर्शन कलावंती देवनानी का रहा।
