शैव दर्शन और अभिनवगुप्त एक ही विषय के दो पहलू: डॉ.कौशल

वैदिक सनातन धर्म प्रचार समिति की विशेष आध्यात्मिक परिचर्चा

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),शैव दर्शन और अभिनवगुप्त एक ही विषय के दो पहलू: डॉ.कौशल। वैदिक सनातन धर्म प्रचार समिति जोधपुर के तत्वावधान में श्रावण मास के पावन पर्व पर सिवांची गेट गड्डी स्थित श्री शिवदत्त महाराज विद्यापीठ के कृष्णानंद स्मृति सभागार में शिव रहस्य उपनिषद्, कश्मीर शैव दर्शन एवं वैदिक वेद विषयक विशेष आध्यात्मिक परिचर्चा का आयोजन हुआ।

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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की पूर्व अधिष्ठाता तथा पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो.डॉ.सरोज कौशल ने अपने विचार प्रस्तुत किए। मुख्य वक्ता प्रो.डॉ.सरोज कौशल ने आचार्य अभिनवगुप्त के ऐतिहासिक एवं दार्शनिक योगदान की विवेचना करते हुए बताया कि शैव दर्शन और अभिनवगुप्त पर चर्चा एक ही विषय के दो पहलू हैं। अभिनवगुप्त के पूर्वज मूलत: मध्यदेश के निवासी थे। कश्मीर के प्रतापी शासक ललितादित्य ने अपने कान्यकुब्ज विजय अभियान के दौरान प्रसिद्ध विद्वान अगस्तिगुप्त को सम्मान पूर्वक कश्मीर में आमंत्रित किया था।

अगस्तिगुप्त ही अभिनवगुप्त के मूल पुरुष थे। लगभग ढाई सौ वर्षों के पश्चात् इसी वंश परम्परा में वराहगुप्त तथा उनके पुत्र नरसिंहगुप्त हुए,जो आचार्य अभिनवगुप्त के पूज्य पिता एवं प्रथम संगीत व दर्शन गुरु थे। समाज शास्त्री कैलाशनाथ व्यास ने परिचर्चा में कालिदास रचित ग्रंथ के मंगलाचरण का संदर्भ देते हुए अष्टमूर्ति शिव के प्रत्यक्ष स्वरूप पर प्रकाश डाला गया।

इतिहासकार प्रो.डॉ.श्याम प्रसाद व्यास ने कहा शिव एक ओर महायोगी हैं,तो दूसरी ओर अनन्य प्रेम के प्रतीक हैं। सती के विरह में शिव द्वारा सती देह को कंधे पर लेकर भ्रमण करने की कथा जहां प्रेम की पराकाष्ठा दर्शाती है, वहीं भारतभर में निर्मित शक्तिपीठ देश की आध्यात्मिक अखंडता को एक सूत्र में पिरोते हैं। इस अवसर पर महेश सीनियर सैकेण्डरी विद्यालय के सेवानिवृत प्रिंसिपल सुमेरसिंह गौड़ ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के प्रारंभ में संत अनुभवदास ने भगवान शिव एवं आदि जगतगुरू शंकराचार्य की तस्वीर पर माल्यार्पण किया।

इस अवसर पर सौन्दर्यलहरी,शिव महिमन,शिव तांडव व अन्य वेद ऋचाओं का पठन किया गया। समिति के अध्यक्ष गोल्डी बिस्सा की अध्यक्षता में आयोजित इस परिचर्चा के अंत में समिति के सचिव डॉ.शैलेंद्र बिस्सा एवं सह-सचिव देवनारायण बिस्सा ने उपस्थित सभी विद्वानों,अतिथियों व धर्मानुरागियों का स्वागत अभिनंदन किया एवं अंत में कैलाशनाथ व्यास ने धन्यवाद ज्ञापित किया।


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