NNF जोधपुर ने किया विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन
- 4 अस्पतालों में हुए जनजागरूकता कार्यक्रम
- माताओं को दिए गए स्तनपान के वैज्ञानिक फायदे
- पहले घंटे में स्तनपान,6 माह तक केवल माँ का दूध का दिया संदेश
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),NNF जोधपुर ने किया विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन।राष्ट्रीय नवजात शिशु फाउंडेशन (NNF) जोधपुर एवं NNF राजपूताना द्वारा विश्व स्तनपान सप्ताह 1-7 अगस्त के अवसर पर शहर के विभिन्न अस्पतालों में सप्ताहभर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
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इस वर्ष का वैश्विक संदेश “Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works” रहा, जिसका उद्देश्य स्तनपान को बढ़ावा देने वाली प्रभावी व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करना है।
4 अस्पतालों में हुए कार्यक्रम
सप्ताह भर बालाजी हॉस्पिटल,वसुंधरा हॉस्पिटल, सरोज हॉस्पिटल एवं त्रिनय हॉस्पिटल में स्वास्थ्य शिक्षा सत्र,मातृ परामर्श, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें बड़ी संख्या में नवजात शिशुओं की माताओं, गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों ने भाग लिया।
यह बताया विशेषज्ञों ने
-जन्म के पहले घंटे में स्तनपान प्रारम्भ करना जरूरी है
-पहले 6 माह तक केवल माँ का दूध देना चाहिए
-2 वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना चाहिए
विशेषज्ञों ने कहा कि माँ का दूध शिशु के लिए संपूर्ण एवं सर्वोत्तम आहार है। यह संक्रमणों से सुरक्षा देता है,मस्तिष्क के विकास में सहायक है तथा माँ में स्तन एवं डिम्बग्रंथि के कैंसर का जोखिम भी कम करता है।
पदाधिकारियों के विचार
NNF जोधपुर के अध्यक्ष डॉ.प्रदीप जैन ने कहा कि “स्तनपान केवल पोषण नहीं,बल्कि शिशु के स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव है। समाज, परिवार एवं स्वास्थ्य कर्मियों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि प्रत्येक माँ को स्तनपान के लिए अनुकूल वातावरण एवं निरंतर सहयोग मिले।
मेंटर डॉ.अनुराग सिंह ने कहा कि शिशु मृत्यु दर एवं कुपोषण को कम करने में स्तनपान की अहम भूमिका है। सही जानकारी से प्रत्येक नवजात को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत दी जा सकती है।
सचिव डॉ.नीरज गुप्ता ने सप्ताहभर चली गतिविधियों की जानकारी दी। कोषाध्यक्ष डॉ.कपिल राहेजा ने सहयोगी अस्पतालों के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों का आभार जताया।
समाज से अपील
NNF जोधपुर ने सभी अभिभावकों एवं समाज से अपील की कि प्रत्येक नवजात को जीवन के पहले 6 माह तक केवल माँ का दूध अवश्य दें तथा माताओं को परिवार एवं कार्यस्थल पर पूर्ण सहयोग प्रदान करें,ताकि स्वस्थ,सक्षम एवं कुपोषण-मुक्त समाज का निर्माण हो सके।
