ओपन जेल में हमसफर बने हत्या के सजायाफ्ता दो कैदी
- उम्रकैद की सजा काट रहे मूलाराम और सीमा ने रचाई शादी
- सुधारात्मक न्याय व्यवस्था का मानवीय स्वरूप आया सामने
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),ओपन जेल में हमसफर बने हत्या के सजायाफ्ता दो कैदी। मंडोर स्थित ओपन जेल में आज प्रेम,विश्वास और नए जीवन की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। जब हत्या के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे दो कैदी मूलाराम और सीमा हमेशा-हमेशा के लिए परिणय सूत्र में बंध गए।
खुली जेल परिसर में आयोजित हुए इस अनूठे विवाह समारोह में कैदी मूलाराम बाकायदा दूल्हा बनकर और सीमा दुल्हन के रूप में विवाह स्थल पहुंचे। दोनों ने एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली और सात फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की। इस विशेष शादी समारोह के दौरान कुल 21 बाराती उपस्थित थे,जिनमें मुख्य रूप से जेल प्रशासन के अधिकारी,कर्मचारी और सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी शामिल थे। पुलिस और जेल प्रशासन के लोगों ने इस शादी में न केवल एक गवाह की भूमिका निभाई,बल्कि दूल्हा और दुल्हन को आशीर्वाद देकर एक खुशहाल भविष्य की कामना भी की। खुली जेल के माहौल में हुए इस सादगीपूर्ण और पवित्र आयोजन ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
इस अनोखे विवाह का मार्ग राजस्थान उच्च न्यायालय के एक विशेष आदेश के बाद प्रशस्त हुआ था। दोनों ही बंदी हत्या के अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अच्छे आचरण के कारण दोनों को मंडोर की खुली जेल में स्थानांतरित किया गया था। जहां रहने के दौरान वे एक-दूसरे के संपर्क में आए और उन्होंने साथ जीवन बिताने का निर्णय लिया। विवाह के लिए दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और बंदियों के पुनर्वास व मानवाधिकारों को ध्यान में रखते हुए इस विवाह को मंजूरी दी और आवश्यक पैरोल प्रदान करने के निर्देश दिए थे।
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हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक और अनूठे आदेश के बाद जेल प्रशासन ने शादी की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की थी। ओपन जेल प्रभारी हापू राम की निगरानी में सुरक्षा एवं आयोजन संबंधी सभी प्रबंध किए गए,जबकि सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने पूरे कार्यक्रम की सतत मॉनिटरिंग की। यह आयोजन इस बात का उदाहरण बना कि सुधारात्मक न्याय व्यवस्था केवल दंड तक सीमित नहीं है,बल्कि बंदियों के पुनर्वास, सामाजिक पुनर्स्थापन और उन्हें सम्मानपूर्वक नया जीवन शुरू करने का अवसर प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
डेढ़ साल से रह रहे हैं ओपन जेल में
मूलाराम और सीमा दोनों पिछले करीब डेढ़ साल से यहां रह रहे हैं। इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई और दोनों ने साथ मिलकर जीवन की एक नई शुरुआत करने का फैसला किया। पति की हत्या के आरोप में साल 2019 से सजा काट रही सीमा के परिवार से महाराष्ट्र से कोई भी इस शादी में शामिल होने नहीं आ पाया।
ऐसे में जेल में बनी सीमा की एक सहेली के पिता जसाणियां की ढाणी रावरा,फलोदी निवासी राधाकिशन वागेला ने पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान किया। इस शादी के लिए कोर्ट के निर्देशानुसार सीमित संख्यां में मेहमानों को शामिल होने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने नागौर निवासी मूलाराम की अस्थाई सजा निलंबन याचिका का निस्तारण करते इस शादी का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
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याचिका में कहा गया था कि विवाह से दोनों के पुनर्वास और सुधार की प्रक्रिया को बल मिलेगा तथा वे भविष्य में सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे। इस पर हाईकोर्ट ने पूर्व निर्णय का हवाला दिया,जिसमें बंदियों के वैवाहिक व संतानोत्पत्ति से संबंधित अधिकार को अनुच्छेद 21 के दायरे में माना गया था। खंडपीठ ने कहा था कि विवाह समाज की आधारभूत संस्था है और दोष सिद्ध बंदियों को भी सहमति से विवाह करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
दोनों आरोपी काट रहे है उम्रकैद की सजा
मूलाराम नागौर के अडसिंगा का निवासी है। परिवार खेती करता था। उसके पिता का पड़ोसी से विवाद था। वर्ष 2017 में मूलाराम पड़ोसी युवक को बाइक पर बिठाकर ले गया था,लेकिन बाद में उसकी लाश टांके से मिली थी। इसके लिए कोर्ट ने मूलाराम को हत्या का दोषी माना था।
अगस्त 2023 में उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। दो साल से वह मंडोर में ओपन और जेल कैंप में सरपंच पद पर काम कर रहा है। सीमा घड़से मूलत: महाराष्ट्र में मुंबई के पास की है। वर्ष 2016 में उसकी शादी जोधपुर के घंटाघर निवासी कौशल राज अरोड़ा से हुई थी। मर्जी के खिलाफ हुई इस शादी से सीमा खुश नहीं थी।
शादी के 2 महीने बाद ही सीमा ने सोते हुए पति की दोनों हाथ की नसें धारदार वस्तु से काट दी थीं। इससे कौशलराज की मौत हो गई थी। उसने चोर आने का बहाना बनाया,लेकिन कोर्ट में वर्ष 2019 में सीमा को उम्रकैद की सजा मिली थी।
