आईआईटी जोधपुर विकसित कर रहा भविष्य की फायरसेफ्टी तकनीक

  • भवन अग्नि सुरक्षा में आईआईटी जोधपुर की नई पहल
  • एआई,डिजिटल ट्विन्स व बीआईएम तकनीक से आग से भवनों की सुरक्षा का होगा वैज्ञानिक आंकलन

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आईआईटी जोधपुर विकसित कर रहा भविष्य की फायरसेफ्टी तकनीक।देशभर में अस्पतालों, कोचिंग संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों,ऊंची आवासीय इमारतों और औद्योगिक इकाइयों में बढ़ती अग्नि दुर्घटनाओं के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर भवन अग्नि सुरक्षा के क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों के विकास पर कार्य कर रहा है। संस्थान के शोधकर्ता एसी कम्प्यूटेशनल तकनीक विकसित कर रहे हैं,जिनसे आग लगने से पहले,आग के दौरान और आग बुझने के बाद भवनों की सुरक्षा का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा।

आफरी में 77वें वन महोत्सव का आयोजन

आईआईटी जोधपुर के सिविल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ.पी. रवि प्रकाश के नेतृत्व में चल रहा यह शोध परफॉर्मेंस-बेस्ड स्ट्रक्चरल फायर इंजीनियरिंग पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल आग बुझाने तक सीमित न रहकर यह समझना है कि भीषण आग के दौरान भवन की संरचना किस प्रकार प्रभावित होती है और भविष्य में संभावित ढहने जैसी घटनाओं को पहले ही रोका जा सके।

शोधकर्ताओं ने ऐसे उन्नत कम्प्यूटेशनल मॉडल विकसित किए हैं,जो विभिन्न परिस्थितियों में आग के फैलाव का सिमुलेशन कर भवन की संरचनात्मक मजबूती का विश्लेषण कर सकते हैं। इनकी मदद से इंजीनियर पहले से कमजोर हिस्सों की पहचान कर बेहतर और अधिक सुरक्षित डिजाइन तैयार कर सकेंगे।

शोध में यह भी सामने आया है कि कई बार भवनों में गंभीर संरचनात्मक क्षति आग बुझने के बाद कूलिंग फेज के दौरान होती है, जिस पर सामान्यत: कम ध्यान दिया जाता है।

एआई आधारित समाधान निकाले
आईआईटी जोधपुर की टीम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित समाधान भी विकसित किए हैं,जो सीमित सेंसर डाटा के आधार पर भवन की फायर रिस्पॉन्स का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। इन्हें अर्ली वार्निंग सिस्टम के साथ जोडक़र अग्नि शमन एवं आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।यह तकनीक आपदा प्रबंधन एजेंसियों, स्ट्रक्चरल इंजीनियरों, बीमा कंपनियों,शहरी योजनाकारों और आपात कालीन सेवाओं के लिए उपयोगी साबित होगी।

अग्नि सुरक्षा के साथ-साथ शोधकर्ता बिल्डिंग इंफॉर्मेशन मॉडलिंग (बीआईएम),डिजिटल ट्विन्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स(आईओटी) और जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) जैसी आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर भवनों के संपूर्ण लाइफ साइकिल मैनेजमेंट पर भी कार्य कर रहे हैं।इन तकनीकों के माध्यम से निर्माण गुणवत्ता, सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट,प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और डिजास्टर प्रिपेयर्डनेस को बेहतर बनाया जा सकेगा।

संरचनात्मक क्षति का पूर्वानुमान
डॉ.पी.रवि प्रकाश ने कहा कि केवल आग बुझा देना पर्याप्त नहीं है,बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि आग लगने से पहले,आग के दौरान और उसके बाद भवन किस प्रकार व्यवहार करता है।

उन्होंने कहा शोध का उद्देश्य इंजीनियरों,नीति- निर्माताओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को ऐसे उन्नत वैज्ञानिक उपकरण उपलब्ध कराना है, जिनकी मदद से संरचनात्मक क्षति का पूर्वानुमान लगाया जा सके और भवनों को प्रारंभिक डिजाइन स्तर से ही अधिक सुरक्षित एवं फायर रेजिलिएंट बनाया जा सके।

उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में एआई, बीआईएम,डिजिटल ट्विन्स और एडवांस्ड कम्प्यूटेशनल तकनीकों के समन्वय से सुरक्षित, स्मार्ट और टिकाऊ भवनों के साथ-साथ अधिक सक्षम एवं आपदा-रोधी शहरों के निर्माण को नई दिशा मिलेगी।

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