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जोधपुर MDM अस्पताल को मिलीं दो अत्याधुनिक जीवन रक्षक मशीनें

  • ICU और नवजातों के इलाज में आएगी क्रांति
  • नॉन-इनवेसिव कार्डियक आउटपुट मॉनिटर और सेप्सिस मशीन से गंभीर मरीजों को मिलेगा तत्काल लाभ
  • RIICO ने CSR के तहत दी सौगात

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जोधपुर MDM अस्पताल को मिलीं दो अत्याधुनिक जीवन रक्षक मशीनें। मथुरादास माथुर अस्पताल (MDM)को दो अत्याधुनिक जीवन रक्षक चिकित्सा मशीनें मिली हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ.विकास राजपुरोहित ने बताया कि यह नई और एडवांस तकनीक अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती गंभीर मरीजों के इलाज में गेम-चेंजर साबित होगी।

नॉन-इनवेसिव कार्डियक आउटपुट मॉनिटर
बिना कैथेटर दिल की निगरानी

कार्डियक आउटपुट
यानी दिल एक मिनट में शरीर के बाकी अंगों तक जितना खून पंप करता है। यह रक्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने तथा अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने का मुख्य कार्य करता है। गंभीर मरीजों के लिए इसकी पल-पल की जानकारी जरूरी होती है।

यह मॉनिटर बिना कैथेटर डाले मरीज के दिल की कार्यप्रणाली का रियल- टाइम डेटा यानी बीट टू बीट डेटा देता है। यह एडल्ट और पीडियाट्रिक केयर दोनों के लिए बेहतरीन है।

पूरी तरह सुरक्षित EC तकनीक
पारंपरिक तरीकों में मरीज की बड़ी नस के जरिए दिल तक कैथेटर डालना पड़ता था,जिसमें दर्द और इन्फेक्शन का खतरा रहता था। इस नॉन-इनवेसिव तकनीक में शरीर में कोई कैथेटर नहीं डाला जाता। यह गर्दन और छाती पर लगे केवल 4 इलेक्ट्रोड्स के जरिए स्ट्रोक वॉल्यूम और कार्डियक आउटपुट की निरंतर निगरानी करता है।
इस तकनीक को इलेक्ट्रिकल कार्डियोमेट्री (EC) कहा जाता है।

बजरी से भरे ओवरलोड दो डंपर जब्त

इस उपकरण को महज 500 ग्राम के नवजात शिशु से लेकर किसी भी वयस्क मरीज तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे डॉक्टरों को दिल की कमजोरी या बीमारी का तुरंत पता चल जाता है। साथ ही दी गई दवा का लाइव रिएक्शन भी स्क्रीन पर दिख जाता है।

सेप्सिस मशीन:3-4 घंटे में संक्रमण की पहचान
आमतौर पर शरीर में गंभीर इन्फेक्शन (सेप्सिस) का सटीक पता चलने में 48 से 72 घंटे का समय लगता है, जिससे मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है। यह नई मशीन महज 3 से 4 घंटे के भीतर ही गंभीर संक्रमण को पकड़ लेती है।

शुरुआती स्टेज में संक्रमण पता चलने से डॉक्टरों को तुरंत सही इलाज शुरू करने का समय मिल जाता है। इससे मरीज जल्दी ठीक होता है और भारी- भरकम दवाओं की जरूरत भी कम पड़ती है।

RIICO के सहयोग से मिलीं मशीनें
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीजों के लिए वरदान साबित होने वाली ये दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित मशीनें रीको (RIICO) द्वारा अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहल के तहत मथुरादास माथुर अस्पताल को उपलब्ध कराई गई हैं।

डॉ.विकास राजपुरोहित ने इस पहल के लिए प्रधानाचार्य डॉ.बीएस जोधा के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।