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डायग्नोस्टिक सेंटर को गलत ब्लड जांच रिपोर्ट देना पड़ा महंगा

  • अपील खारिज
  • एक लाख रुपए का हर्जाना बरकरार

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),डायग्नोस्टिक सेंटर को गलत ब्लड जांच रिपोर्ट देना पड़ा महंगा। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जोधपुर पीठ ने गलत ब्लड जांच रिपोर्ट देने के मामले में जोधपुर सीटी एंड डायग्नोस्टिक सेंटर को राहत देने से इनकार करते हुए जिला आयोग द्वारा लगाए गए एक लाख रुपये के हर्जाने को बरकरार रखा है। आयोग ने सेंटर की अपील खारिज करते हुए माना कि मामले में सेवा में त्रुटि एवं अनुचित व्यापारिक व्यवहार साबित हुआ है।

मामले के अनुसार चौपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी हनी शर्मा सोनी ने चिकित्सकीय परामर्श पर 1 अप्रैल 2021 को सीरम बाइल एसिड जांच जोधपुर सीटी एंड डायग्नोस्टिक सेंटर से करवाई थी। जांच रिपोर्ट में एसिड का स्तर सामान्य से अधिक बताया गया, जिसके आधार पर चिकित्सकों ने उन्हें हाई डोज की दवाइयां लिखीं। बाद में उसी सेंटर से करवाई गई कई जांचों में भी एसिड का स्तर लगातार अधिक दर्शाया गया। दवाइयों का अपेक्षित असर नहीं होने पर परिवादिया ने अन्य चिकित्सकों से परामर्श लिया।

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चिकित्सकों की सलाह पर अन्य प्रयोगशालाओं में जांच करवाई गई, जहां रिपोर्ट में एसिड का स्तर सामान्य सीमा में पाया गया। इसके बाद परिवादिया ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर सेंटर पर गलत रिपोर्ट देने और अनुचित व्यापारिक व्यवहार अपनाने का आरोप लगाया। सुनवाई के बाद जिला आयोग ने परिवादिया के पक्ष में एक लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया। जिला आयोग के आदेश के खिलाफ डायग्नोस्टिक सेंटर ने राज्य आयोग में अपील दायर की। अपील की सुनवाई के दौरान सेंटर की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ।

जिला आयोग का आदेश उचित और न्यायोचित
आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छावाहा एवं सदस्य लियाकत अली ने उपलब्ध दस्तावेजों और परिवादिया पक्ष की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि जांच के लिए नमूना और शुल्क डायग्नोस्टिक सेंटर ने ही प्राप्त किया था। भले ही जांच किसी अन्य एजेंसी से करवाई गई हो, लेकिन उपभोक्ता के प्रति जवाबदेही सेंटर की ही बनती है।

आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि यदि जांच एजेंसी द्वारा गलत रिपोर्ट तैयार की गई है तो उसका खामियाजा उपभोक्ता को नहीं भुगतना पड़ सकता। यह सेंटर और संबंधित लैब के बीच का विषय है। जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा सेवा में त्रुटि और अनुचित व्यापारिक व्यवहार संबंधी दिए गए निष्कर्षों में कोई कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि नहीं पाई गई।

इसी आधार पर राज्य आयोग ने डायग्नोस्टिक सेंटर की अपील को खारिज करते हुए जिला आयोग के आदेश को उचित और न्यायोचित ठहराया।