हाईकोर्ट ने नए राजस्व गांव खींचन विस्तार को दी मंजूरी
कोर्ट ने की रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),हाईकोर्ट ने नए राजस्व गांव खींचन विस्तार को दी मंजूरी। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने फलोदी जिले में नए राजस्व गांव खींचन विस्तार के गठन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि राज्य सरकार ने गांव के गठन की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार पूरी की और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए लिया गया निर्णय कानून सम्मत है।
कृषि विभाग ने छापेमारी के 14 दिन बाद दर्ज करवाया मामला
खींचन निवासी सत्यनारायण सिंह राजपुरोहित ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राजस्व विभाग की 13 दिसंबर 2025 की अधिसूचना को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि खींचन विस्तार गांव का गठन निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं है और पहले की प्रक्रिया में इसे रद्द किया जा चुका था। इसलिए दोबारा अधिसूचना जारी करना गलत है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि नए गांव के गठन से पहले अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में सामने आया कि खीचन और खीचन विस्तार के बीच दूरी निर्धारित मानकों के अनुसार है। अलग- अलग रास्तों से दोनों गांवों के केंद्र बिंदुओं की दूरी 1 किलोमीटर से अधिक पाई गई।
गठन को गलत नहीं माना जा सकता
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल कुछ खसरों के आपस में जुड़े होने के आधार पर गांव गठन को गलत नहीं माना जा सकता। नए गांव बनाने के लिए दूरी, प्रशासनिक सुविधा, विकास की संभावना और स्थानीय जरूरतों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। याचिकाकर्ता की ओर से राजनीतिक दबाव में अधिसूचना जारी होने का आरोप भी लगाया गया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा मांग या सुझाव दिए जाने मात्र से प्रशासनिक फैसला अवैध नहीं हो जाता। इसके लिए ठोस दुर्भावना या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण जरूरी हैं।
कोर्ट ने राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांवों के गठन और सीमाओं में बदलाव का अधिकार राज्य सरकार के पास है। पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और खीचन विस्तार गांव के गठन को बरकरार रखा।
