आवेदन के समय प्रभावी नियम से तय होगी अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता: हाईकोर्ट
अविवाहित महिला को मृत सरकारी कर्मचारी बहन के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का मिला लाभ
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आवेदन के समय प्रभावी नियम से तय होगी अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता: हाईकोर्ट। राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार के फैसले को गलत बताते हुए अविवाहित बहन को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि एक अविवाहित महिला को अपनी मृत सरकारी कर्मचारी बहन के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिल सकता है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस निर्णय को गलत ठहराया है,जिसमें अविवाहित महिला को उसकी मृत सरकारी कर्मचारी बहन के आश्रित होने के बावजूद नियुक्ति का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था।
कोर्ट ने कहा कि पात्रता का परीक्षण केवल मृत्यु की तारीख के आधार पर नहीं किया जा सकता,बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि आवेदन के समय कौन से नियम प्रभावी थे। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने विभागीय आदेश रद्द कर मामले पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं।
जोधपुर निवासी अरुणा ओझा की ओर से अधिवक्ता निशित शाह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उनकी बहन करुणा ओझा अभियोजन विभाग में अभियोजन अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। करुणा ओझा का 13 सितंबर 2021 को निधन हो गया था। वह अविवाहित थीं और अरुणा ओझा पूरी तरह उन पर निर्भर थीं। करुणा ओझा की मृत्यु के कुछ सप्ताह बाद राज्य सरकार ने 28 अक्टूबर 2021 को राजस्थान अनुकंपा नियुक्ति नियम,1996 में संशोधन किया। संशोधन के तहत अविवाहित मृत सरकारी कर्मचारी की आश्रित अविवाहित बहन को भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र माना गया। इसके बाद अरुणा ओझा ने निर्धारित अवधि के भीतर नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
हालांकि अभियोजन विभाग ने नवंबर 2023 में उनका आवेदन यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि संशोधित नियम करुणा ओझा की मृत्यु के बाद लागू हुए थे और इन्हें पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। विभाग ने इसी आधार पर अरुणा को अपात्र मान लिया। जस्टिस अरुण मोंगा ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि याचिका कर्ता ने मृत्यु के बाद निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर आवेदन किया था। उस समय संशोधित नियम प्रभाव में आ चुके थे।
कोर्ट ने यह जारी किए आदेश:-
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता संशोधन को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने की मांग नहीं कर रही थीं,बल्कि आवेदन की तारीख पर लागू नियमों के तहत अपने अधिकार का दावा कर रही थीं। कोर्ट ने माना कि विभाग ने पात्रता तय करते समय नियमों की गलत व्याख्या की। केवल इसलिए लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि कर्मचारी की मृत्यु संशोधन लागू होने से पहले हुई थी। यदि आवेदन के समय नियम लागू थे तो उनका लाभ संबंधित आवेदक को मिल सकता है। हाईकोर्ट ने विभाग का आदेश निरस्त करते हुए सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि अरुणा ओझा के मामले पर पुनर्विचार किया जाए। यदि वह अन्य सभी शर्तों के अनुसार पात्र पाई जाती हैं तो उन्हें अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया जाए।
