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बिना एनओसी चल रहे पशुपालन कॉलेजों पर हाईकोर्ट सख्त

प्रत्येक संस्थान पर एक लाख रुपए का जुर्माना

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बिना एनओसी चल रहे पशुपालन कॉलेजों पर हाईकोर्ट सख्त। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की बेंच ने बिना वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के प्रवेश देने वाले निजी पशुपालन डिप्लोमा संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की एनओसी के बिना कोई भी संस्थान प्रवेश प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकता और ऐसे संस्थानों का संचालन पूरी तरह अवैध माना जाएगा।

सुनवाई के दौरान राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटनरी एंड एनिमल साइंसेज बीकानेर की ओर से अधिवक्ता अजय कुमार व्यास और जतिन सांखला ने कोर्ट को बताया कि संबंधित संस्थानों को दी गई संबद्धता केवल अस्थायी थी और यह राज्य सरकार से एनओसी प्राप्त करने की शर्त पर आधारित थी। इसके बावजूद संस्थान निर्धारित समय में आवश्यक अनुमति हासिल नहीं कर सके। कोर्ट ने कहा कि संस्थानों को कई अवसर दिए गए थे। राज्य सरकार ने 13 जनवरी से 27 फरवरी 2026 तक आवेदन के लिए विशेष विंडो भी खोली थी,लेकिन संस्थानों ने आवेदन करने के बजाय न्यायालय की शरण लेना उचित समझा।

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इसे न्यायिक प्रक्रिया और समय की अनावश्यक बर्बादी मानते हुए अदालत ने सभी याचिकाकर्ता संस्थानों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह राशि चार सप्ताह के भीतर राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

एक महीने का दिया समय
विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी को आदेश दिया कि प्रभावित छात्रों को एक महीने के भीतर सरकारी अथवा मान्यता प्राप्त संस्थानों में स्थानांतरित किया जाए, ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान सत्र में संस्थानों को कोई राहत नहीं मिलेगी। हालांकि वे शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए राज्य सरकार की नीति के अनुसार दोबारा एनओसी के लिए आवेदन कर सकते हैं।