इलिजारोव तकनीक से नॉन यूनियन व डिफॉर्मिटी का सफल उपचार

महात्मा गांधी चिकित्सालय को बड़ी सफलता

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),इलिजारोव तकनीक से नॉन यूनियन व डिफॉर्मिटी का सफल उपचार।महात्मा गांधी चिकित्सालय, जोधपुर के हड्डी एवं जोड़ रोग विभाग में इलिजारोव तकनीक का उपयोग करते हुए दो बच्चों के पैर की जटिल हड्‌डी न जुड़ना एवं टेढ़ेपन का सफलता पूर्वक ऑपरेशन किया गया।

झालामंड निवासी 6 वर्षीय किशोर को तीन वर्ष पूर्व दुर्घटना में दाहिने पैर की हड्डी टखने के ऊपर से टूट गई थी। इसके उपचार हेतु जोधपुर एवं अहमदाबाद में पाँच बार सर्जरी करवाई गई,लेकिन हड्डी नहीं जुड़ सकी तथा पैर में टेढ़ापन लगातार बढ़ता रहा,जिससे मरीज का चलना-फिरना अत्यंत कठिन हो गया था।

इसी प्रकार,शेरगढ़ निवासी 9 वर्षीय सुशिला के दाहिने पैर में एक वर्ष पूर्व हुई दुर्घटना के कारण टखने के ऊपर की हड्डी में 7-8 सेंटीमीटर की खाली जगह बन गई थी,जिसके चलते उसका चलना-फिरना बंद हो गया था और वह लगभग बेड-रिडन हो गई थी।

दोनों मरीजों की सर्जरी महात्मा गांधी चिकित्सालय में सीनियर प्रोफेसर डॉ.किशोर रायचंदानी के नेतृत्व में योजनाबद्ध तरीके से की गई। बाहरी त्वचा एवं सॉफ्ट टिशू की स्थिति उपयुक्त न होने के कारण इलिजारोव रिंग फिक्सेटर का उपयोग किया गया।

डॉ.निरोत्तम सिंह ने बताया कि सुशीला के केस में डिस्ट्रैक्शन हिस्टोजेनेसिस के सिद्धांत के आधार पर लगभग 7 सेंटी मीटर नई हड्डी का क्रमिक निर्माण किया गया तथा पास वाली फिबुला हड्‌डी को खाली हुई जगह में विस्थापित किया गया।

किशोर के केस में स्टिफ नॉन- यूनियन एवं प्रोकर्वेटम-वेरस डिफॉर्मिटी को ध्यान में रखते हुए फिबुलर ऑस्टियोटॉमी की गई तथा डिफॉर्मिटी के एपेक्स को क्रमिक ड्रिलिंग द्वारा सॉफ्ट किया गया। इसके बाद इलिजारोव रिंग फिक्सेटर की सहायता से डिफॉर्मिटी को पूर्णतः सुधारा गया तथा नॉन-यूनियन साइट को सही एलाइनमेंट में स्थिर किया गया।

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यूनिट प्रभारी डॉ.किशोर रायचन्दानी ने बताया कि उनकी सर्जिकल टीम में उनके अलावा ‘सहायक आचार्य डॉ.निरोत्तम सिंह, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज रेहडू,सीनियर रेजिडेंट डॉ. राजेश कुमार राहड़,डॉ.अजय बाकोलिया,रेजिडेंट डॉ.अंकित कुमार,डॉ.आदित्य एवं डॉ.राहुल शामिल थे। ऐनेस्थीसिया विभाग से सह आचार्य डॉ.अभिलाषा थानवी, रेजिडेंट डॉ.आशीका एवं डॉ. जेनिफर का सहयोग रहा। इसके अतिरिक्त नर्सिंग स्टाफ में निशा सैनी,ममता चौधरी एवं निशा परविन तथा सपोर्टिंग स्टाफ में विकास,अकरम एवं शहनवाज का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जरी के बाद रिकवरी में फिजियोथैरेपिस्ट डॉ.नीलम गौड़ का विशेष योगदान रहा।

विभागाध्यक्ष डॉ.अरुण कुमार वैश्य ने बताया कि ऑर्थोपेडिक विभाग में सभी प्रकार के जटिल एवं कॉम्प्लेक्स मामलों का उपचार नवीनतम तकनीकों के माध्यम से सफलतापूर्वक किया जा रहा है।
महात्मा गांधी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ.एफएस भाटी एवं एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.बीएस जोधा ने इस सफल ऑपरेशन के लिए संपूर्ण टीम को बधाई दी तथा भविष्य में भी ऐसे जटिल एवं यूनिक मामलों को करने के लिए प्रोत्साहित किया।