बेंतमार मेले की मस्ती में पूरी रात रहा महिलाओं का राज

  • धींगा गवर मेले में रही बाहरी पुरुषों की नोएंट्री
  • पुलिस का सख्त पहरा

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बेंतमार मेले की मस्ती में पूरी रात रहा महिलाओं का राज। अखण्ड सौभाग्य,सुहाग व महिला सशक्तिकरण से जुड़ा धींगा गवर मेला आज रात श्रद्धा, उल्लास,उमंग व मस्ती के साथ मनाया गया। विश्व प्रसिद्ध धींगा गवर उत्सव हर बार की तरह इस बार भी अनूठा रहा। तकरीबन पांच सदियों से चले आ रहे इस उत्सव में इस बार भी बाहरी पुरुषों-युवाओं की एंट्री पर पूरी तरह पाबंदी रही और पुलिस ने भी इसे सख्ती से लागू करने के इंतजाम किए।

उल्लेखनीय है कि गत दिनों भोळावणी मेले के दौरान महिलाओं-युवतियों से बदसलूकी व छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आने के बाद भीतरी शहर में खासा रोष फैल गया था। इसके बाद पुलिस प्रशासन के साथ महिलाओं और उत्सव समितियों के पदाधिकारियों की बैठक हुई थी। उसमें महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट कहा था कि धींगा गवर का उत्सव उनकी आस्था और परंपरा से जुड़ा है। इसमें बाहरी तत्वों के पहुंचने से उनकी आस्था को ठेस पहुंच रही है। इसके लिए जरूरी है कि पुलिस उत्सव के दौरान किसी को भी स्टेज, डीजे इत्यादि की अनुमति नहीं दे।

पूरी रात सडक़ों पर केवल मातृशक्ति का प्रभुत्व
धींगा गवर उत्सव में पूरी रात सडकों पर केवल मातृशक्ति का प्रभुत्व दिखाई दिया। इस दौरान भीतरी शहर में कई स्थानों पर गणगौर विराजमान की गई,जहां महिलाएं दर्शन-पूजन करने पहुंची। इससे जुड़ी एक मान्यता ये भी है कि तीजणियों के हाथ की छड़ी, जिस भी कुंवारे युवक के लगती है, वो जल्द ही शादी के बंधन में बंध जाते हैं। इसी वजह से इस उत्सव को बेंतमार मेला भी कहा जाता है।
रिश्तेदारों के यहां जाकर किया गवर गीत का गायन

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देर रात तक सडकों पर महिलाओं ने समूह के रूप में विभिन्न देवी- देवताओं,गवर-ईसर के स्वांग रचकर हाथ में छड़ी लेकर सगे-संबंधियों सहित रिश्तेदारों के यहां जाकर गवर गीत का गायन भी किया। रात में कई मोहल्लों में तीजणियों द्वारा धींगा गवर माता की चार प्रहर में आरती की गई और अंतिम आरती के पश्चात भोळावणी करते हुए 16 दिन के पूजन का समापन किया।

भीतरी शहर में ब्राह्मण व स्वर्णकार समाज सहित विभिन्न समाजों की महिलाएं 16 दिन तक पूजन करती हैं,जिसका समापन धींगा गवर उत्सव के रूप में हुआ। इस पूजन में विधवा महिलाएं भी शामिल होती हैं, लेकिन कुंवारी कन्या यह पूजन नहीं करती हैं। सुहाग के पूजन की निशानी उसके हाथ पर बंधा धागा होता है।

मनचलों को रोकने के लिए लगाए एंट्री गेट
मेले में इस बार हुड़दंग करने वालों और बाहर से आने वाले मनचलों पर पुलिस की नजर रही। इसके लिए ड्रोन और कैमरों की मदद से मॉनिटरिंग की गई,मेले में एंट्री करने के लिए भीतरी शहर में एंट्री के प्रमुख मार्गों पर पुलिस की और से नाके भी लगाए गए। शहर के पुष्टिकर स्कूल,हनुमान चौक,हाथी चौक,कबूतरों का चौक,सोनारो की घाटी,सिटी पुलिस,शाहपुरा,मोती चौक,जुनी मंडी आडा बाजार, कुमारियां कुआं,नव चौकिया आदि जगहों पर आयोजन हुए।