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मुख्यमंत्री के जोधपुर पहुंचने पर स्वागत में उमड़े कार्यकर्ता,लोगों ने सौंपे ज्ञापन

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),मुख्यमंत्री के जोधपुर पहुंचने पर स्वागत में उमड़े कार्यकर्ता,लोगों ने सौंपे ज्ञापन।मुख्य मंत्री भजनलाल शर्मा शुक्रवार को जोधपुर के संक्षित प्रवास पर आए। इस दौरान उनका एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत किया गया। कई लोगों ने उन्हें अपनी समस्याओं के ज्ञापन भी सौंपे।

मुख्यमंत्री का जोधपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट पर राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत,संसदीय कार्य मंत्री जोगा राम पटेल,जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत सिंह विश्नोई, शहर विधायक अतुल भंसाली, सूरसागर विधायक देवेंद्र जोशी, बिलाड़ा विधायक अर्जुनलाल गर्ग, पूर्व राज्य मंत्री प्रो.महेंद्र सिंह राठौड़, पूर्व राज्यमंत्री मेघराज लोहिया, भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल,देहात जिलाध्यक्ष त्रिभुवन सिंह भाटी,पूर्व जिला प्रमुख पूनाराम चौधरी,जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल,सीईओ जिला परिषद आशीष कुमार मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने स्वागत किया।

इस दौरान कई संस्था-संगठनों ने उन्हें ज्ञापन सौंपे। राजस्थान में पैरामेडिकल एवं नर्सिंग संवर्ग की भर्तियों को लेकर उत्पन्न गंभीर स्थिति के संबंध में पैरामेडिकल भर्ती संघर्ष समिति 2025 के प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन सौंपकर राज्य के हजारों कार्यरत संविदा व निविदा कार्मिकों एवं बेरोजगार युवाओं की पीड़ा से अवगत कराया।

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समिति ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि निदेशालय,चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं,राजस्थान,जयपुर द्वारा भविष्य में की जाने वाली भर्तियों को केवल लिखित परीक्षा के माध्यम से करवाने हेतु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा नियम,1965 में संशोधन संबंधी फाइल वर्तमान में वित्त विभाग,कार्मिक विभाग एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग से अनुमोदन के उपरांत विधि विभाग के स्तर पर विचाराधीन है।

संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव रामप्रसाद रियाड़ ने स्पष्ट किया कि उक्त प्रस्तावित संशोधन यदि लागू किया जाता है, तो यह वर्षों से अल्प मानदेय पर कार्यरत संविदा एवं निविदा नर्सेज व पैरामेडिकल कार्मिकों के भविष्य के लिए अत्यंत प्रतिकूल सिद्ध होगा। इससे न केवल उनके स्थायी होने की बहुप्रतीक्षित संभावना समाप्त हो जाएगी, बल्कि यह निर्णय राज्य के हजारों बेरोजगार युवाओं के साथ भी गंभीर अन्याय होगा।

समिति का कहना है कि केवल लिखित परीक्षा आधारित भर्ती प्रणाली लागू करने से ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्य रीढ़ माने जाने वाले अनुभवी संविदा/निविदा कार्मिकों का वर्षों का अनुभव पूरी तरह नजरअंदाज हो जाएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।