यूजर्स के लिए यूपीआई निःशुल्क रहेगी

  • व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं
  • सरकार ने स्पष्ट किया पीएस अधिनियम में संशोधन यूपीआई को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए

नई दिल्ली(दूरदृष्टीन्यूज),यूजर्स के लिए यूपीआई निःशुल्क रहेगी। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूपीआई उपयोग कर्ताओं के लिए पूरी तरह निःशुल्क रहेगी और व्यापारियों के लिए भी अधिकांश लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

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भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम (PSS Act,2007) में हालिया संशोधन को लेकर भ्रम की स्थिति पर सरकार ने कहा कि यह संशोधन यूपीआई की दीर्घकालिक स्थिरता,तकनीकी उन्नयन,साइबर सुरक्षा और उभरते जोखिमों के प्रति लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

सरकार के प्रमुख बिंदु

1.यूजर्स के लिए निःशुल्क: भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार का लेन-देन शुल्क नहीं देना होगा।

2.P2P लेन-देन निःशुल्क: सभी पर्सन- टू-पर्सन लेन-देन हमेशा निःशुल्क रहेंगे।

3.व्यापारियों के लिए मामूली एमडीआर: यदि एमडीआर लागू होता है तो वह केवल सीमित संख्या में,एक निश्चित सीमा से अधिक के व्यापारी लेन-देन पर बहुत मामूली दर पर लगेगा। यह दर डेबिट/क्रेडिट कार्ड एमडीआर से काफी कम होगी। अधिकांश व्यापारी लेन-देन निःशुल्क रहेंगे।

4.निर्णय समिति करेगी: संसद से कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक,2026 पारित होने के बाद NPCI की अध्यक्षता वाली “UPI और सेवा संचालन समिति” एमडीआर पर निर्णय लेगी।

संशोधन क्यों जरूरी?
सरकार के अनुसार यूपीआई पर हर महीने अरबों लेन-देन हो रहे हैं। सिस्टम को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम व इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए लगातार निवेश चाहिए। बाजार में अधिक कंपनियों को लाने और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल आवश्यक है। केवल सब्सिडी पर निर्भर रहना अब व्यवहारिक नहीं है।

अफवाहों का खंडन
सरकार ने कुछ मीडिया रिपोर्टों को निराधार और भ्रामक बताया,जिनमें कहा गया कि बाहरी दबाव में नीति बदली गई है। सरकार ने कहा कि यदि बाहरी दबाव होता तो 2016 में यूपीआई शुरू नहीं होती और जनवरी 2020 से इसे निःशुल्क नहीं रखा जाता।

यूपीआई की उपलब्धियां
वर्ष 2016-17 में शुरू हुआ यूपीआई आज दुनिया की सबसे बड़ी त्वरित भुगतान प्रणाली है।
-जुलाई 2026 में ₹29.9 लाख करोड़ के 2,366 करोड़ लेन-देन
-अब 11 विदेशी देशों में सक्रिय,कई अन्य देश भी रुचि दिखा रहे हैं।

निष्कर्ष
सरकार ने पुष्टि की
-यूपीआई नागरिकों के लिए निःशुल्क रहेगी
-दैनिक लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं
-भविष्य में एमडीआर हुआ तो वह नाममात्र और चुनिंदा व्यापारियों पर ही
-यूपीआई भारत का प्रमुख डिजिटल नवाचार है और इसे आने वाले दशकों तक मजबूत रखा जाएगा।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे वित्त मंत्रालय,RBI और NPCI की आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और असत्यापित जानकारी को आगे न भेजें।

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