डिजिटल अरेस्ट गैंग से जुड़े दो साइबर ठग गिरफ्तार,करोड़ों की ठगी का खुलासा
- आरोपी दक्षिण भारत की साइबर ठगी गैंग के लिए फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध करवाता था
- आतंकवाद और मनी लॉड्रिंग का डर दिखाकर करता डिजिटल अरेस्ट
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),डिजिटल अरेस्ट गैंग से जुड़े दो साइबर ठग गिरफ्तार,करोड़ों की ठगी का खुलासा। शहर की चौपासनी हाउसिंग बोर्ड पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए डिजिटल अरेस्ट गैंग से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में श्रवण विश्नोई और धीरेन्द्रसिंह शामिल हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी श्रवण विश्नोई दक्षिण भारत की साइबर ठगी गैंग के लिए फर्जी बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध करवाता था और करोड़ों रुपये की साइबर ठगी में शामिल रहा है।
यह है मामला
थानाधिकारी ईश्वरचंद पारिक ने बताया कि 6 मई को सेक्टर 17 ई सीएचबी निवासी किराणा व्यापारी भीकमचंद जैन ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। परिवादी ने बताया कि उसके एचडीएफसी बैंक खाते को ब्लॉक कर दिया गया। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़े दो ट्रांजेक्शन हुए थे,जिसके चलते खाता फ्रीज किया गया। व्यापारी ने दुकान के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो सामने आया कि एक काली स्कॉर्पियो में आए दो युवक करीब 36 हजार रुपये का किराणा सामान खरीदकर गए थे।
आरोपियों ने दुकान के फोन पे स्कैनर का फोटो लेकर ऑनलाइन भुगतान करवाया था। बाद में पता चला कि यह राशि साइबर ठगी की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त शरत कविराज और पुलिस उपायुक्त कमल शेखावत के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने धीरेन्द्रसिंह और श्रवण विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया।
तीन साल से साइबर ठगों के साथ नेटवर्किंग
पूछताछ में आरोपी धीरेन्द्र सिंह ने बताया कि श्रवण विश्नोई लंबे समय से साइबर फ्रॉड में सक्रिय है। उसने बताया कि जिस राशि से किराणा सामान खरीदा गया था,वह डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगे गए पैसों में से थी। मुख्य आरोपी श्रवण विश्नोई ने खुलासा किया कि वह वर्ष 2023 से साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। वह अपने नाम के बैंक खाते या सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं करता था। उसका संपर्क टेलीग्राम के माध्यम से दक्षिण भारत की साइबर गैंग से था और वह कई बार चेन्नई जाकर गिरोह के सदस्यों से मिल चुका है।
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किराये पर बैंक खाते और फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध करवाता
आरोपी अन्य राज्यों से किराये पर बैंक खाते और फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध करवाता था। डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी गई राशि इन्हीं खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी। बाद में रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर नकद में बदल दिया जाता था। गैंग के हिस्से का कमीशन डिजिटल करेंसी यूएसडीटी (क्रिप्टो) के जरिए भेजा जाता था।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने स्वीकार किया कि 18 अप्रैल 2026 को किराणा दुकान पर किया गया भुगतान तमिलनाडु के तिरुवन्नामलई जिले के एक 70 वर्षीय बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे गए 8.70 लाख रुपये में से किया गया था। इस संबंध में तमिलनाडु के साइबर पुलिस थाने में मामला दर्ज है।
6 फर्जी सिम कार्ड और 3 मोबाइल फोन जब्त
पुलिस ने आरोपी श्रवण विश्नोई के कब्जे से 6 फर्जी सिम कार्ड और 3 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। साथ ही आरोपियों द्वारा अब तक की गई साइबर ठगी के संबंध में विभिन्न बैंकों और सिम कंपनियों से रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है। मामले में आगे की जांच और पूछताछ जारी है।
आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में फंसाने का डर दिखाता
पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों को आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में फंसाने का डर दिखाकर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते थे। इसके बाद पीडि़तों को डिजिटल अरेस्ट कर उनकी जमा राशि तथाकथित आरबीआई खाते में ट्रांसफर करवाते थे,जो वास्तव में साइबर अपराधियों के म्यूल अकाउंट होते थे।
