एमडीएमएच में खून की महाधमनी की सफल बेंटाल सर्जरी

एमडीएमएच में खून की महाधमनी की सफल बेंटाल सर्जरी

जोधपुर,शहर के मथुरादास माथुर अस्पताल के उत्कर्ष कार्डियोथोरेसिक विभाग में थोरेसिक अयोर्टिक रूट डाइलेटेशन एवं एन्यूरिज्म (खून की महाधमनी अयोर्रटा की बीमारी) की सफल बेंटाल सर्जरी की गई। डॉ सुभाष बलारा (सीटीवीएस विभागअध्यक्ष) ने बताया कि शेरगढ़ निवासी 46 वर्षीय दिलीप सिंह को गत दो वर्षों से पैरों में सूजन तथा अनायास सांस फूलने की तकलीफ थी इस बीच गिर जाने के कारण उनके दिमाग में खून के थक्के जम गए उन्होने प्रारंभिक इलाज लिया परंतु आराम न मिलने की स्थिति में वह मथुरादास माथुर अस्पताल में भर्ती हुए जहां जांचों (इको,सिटी ब्रेन,सिटी ऑटोग्राफ)में थोरेसिक अयोर्टिक एन्यूरिज्म के साथ अयोरटिक वाल्व में लीकेज होने की पुष्टि हुई। यह अनूरिज्म काफी बड़ा होकर फटने की कगार तक पहुंच गया था जिसके कारण उनके शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द तथा सांस फूलने की तकलीफ रहने लगी‌ थी। इसको देखते हुए सर्जरी का निर्णय लिया गया।

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आपरेशन टीम
डॉ सुभाष बलारा (विभागाध्यक्ष सीटीवीएस),डॉअभिनव सिंह (सहायक आचार्य) डॉ देवाराम (सहायक आचार्य) एनेस्थीसिया विभाग के डॉ राकेश करनावत (सीनियर प्रोफेसर),डॉ गायत्री (सहायक आचार्य)ओटी स्टाफ दिलीप,मोनिका,नीलम ओटी इंचार्ज दिनेश गोस्वामी,आसिफ इकबाल, परफ्यूशनिस्ट माधव सिंह और मनोज, आईसीयू के डॉ नरेंद्र,डॉ रोहित,डॉ सरफराज स्टाफ नरेश,हरि सिंह,सीमा एवं राजेंद्र ने इलाज प्रक्रिया में अपना सहयोग प्रदान किया। सहायक आचार्य डॉ अभिनव सिंह ने बताया कि थोरेसिक अयोरटिक एन्यूरिज्म के साथ रूट डाइलेटेशन एक जटिल बीमारी है और समय पर इलाज न लेने से यह जानलेवा हो सकती है। इस बीमारी का इंसिडेन्स 5 से 10 प्रति एक लाख पापुलेशन होता है और यह 40 से 60 वर्ष के पुरुषों में महिलाओं की अपेक्षा 2 से 4 गुना ज्यादा पाई जाती है। इस बीमारी का मुख्य कारण एथेरोसिलेरोसिस, हाइपरटेंशन,कनेक्टिव टिशुडिसऑर्डर जैसे कि मर्फान सिंड्रोम,बाईकस्पिड ऑर्टिक वाल्व है और जेनेटिक प्रेडिस्पोजिशन होने के कारण फैमिलीज में भी रन करती है। आयोर्टिक रूट डायलेक्ट होने के कारण वाल्व में लीकेज भी होता है जिसका इलाज सर्जरी है। इस बीमारी में ऑर्टिक वाल्व और एन्यूरिज्म को एक साथ ग्राफ्ट कनड्यूट से रिप्लेस किया जाता तथा कोरोनरी बटंस को ग्राफ्ट में रिइंप्लांट किया जाता है। समय रहते ऑपरेशन न करने से मरीज की अयोरटा (मुख्य धमनी) में डिसेक्शन या रप्चर (एन्यूरिज्म का फटना)भी हो सकता है।इस ऑपरेशन को बाईपास मशीन पर किया जाता। ऑपरेशन के पश्चात मरीज का इलाज सीटी आईसीयू में चल रहा है और वह पूर्णता स्वस्थ है। डॉ‌ एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल व नियंत्रक डॉ दिलीप कछवाहा तथा एमडीएम अस्ताल के अधीक्षक डॉ विकास राजपुरोहित ने डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता डॉ जयराम रावतानी ने बताया कि यह ऑपरेशन मथुरा दास माथुर अस्पताल में निःशुल्क किया गया।

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