आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व नई उपचार पद्धतियों पर गहन चर्चा

  • आरआरएकोन-2026 संपन्न
  • दूसरे दिन विशेषज्ञों ने रूमेटोलॉजी में आधुनिक तकनीक और भविष्य की चुनौतियों पर रखे विचार

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व नई उपचार पद्धतियों पर गहन चर्चा। राजस्थान रूमेटोलॉजी एसोसिएशन के तृतीय वार्षिक सम्मेलन आरआरएकोन-2026 का रविवार को समापन हुआ। सम्मेलन के दूसरे एवं अंतिम दिन रूमेटोलॉजी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नई दवाओं,जटिल ऑटोइम्यून रोगों तथा आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तृत वैज्ञानिक चर्चा हुई। देशभर से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए भविष्य की चिकित्सा चुनौतियों और संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

दूसरे दिन की शुरुआत रोचक क्लीनिकल केस प्रस्तुतियों से हुई। डॉ. अरुण तिवारी ने “द मिस्ट्री बिनीथ द स्किन”विषय पर दुर्लभ त्वचा संबंधी संकेतों के माध्यम से रोग पहचान की जटिलताओं को समझाया। इसके बाद डॉ. सत्येन्द्र खीचर ने बार-बार गर्भपात के एक जटिल मामले में साधारण क्लीनिकल संकेत की महत्ता पर प्रकाश डाला। डॉ.सोनल निहलानी एवं डॉ.अरुण बरगली ने भी चुनौती पूर्ण मामलों की प्रस्तुति देकर चिकित्सकों को महत्वपूर्ण क्लीनिकल सीख प्रदान की।

नशे के खिलाफ जागरूकता व्याख्यान

सम्मेलन के प्रमुख वैज्ञानिक सत्र में डॉ. विकास अग्रवाल ने सिस्टमिक स्क्लेरोसिस में एंटीफाइब्रोटिक दवाओं की बढ़ती भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया कि अब इन उपचारों का उपयोग केवल इंटरस्टिशियल लंग डिजीज तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक उपचार पद्धतियां रोगियों की जीवन गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं।

दूसरे दिन का सबसे आकर्षक सत्र “असिस्टिव एआई फॉर अर्ली डायग्नोसिस एंड बेटर प्रोग्नोसिस”रहा,जिसमें प्रोफेसर सुमित कालरा ने चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई आधारित तकनीकें जटिल ऑटोइम्यून रोगों की शीघ्र पहचान और बेहतर उपचार योजना बनाने में चिकित्सकों की सहायता कर सकती हैं। इस सत्र में उपस्थित युवा चिकित्सकों व शोधार्थियों ने विशेष रुचि दिखाई।

इसके बाद आयोजित बहस में जेक इनहिबिटर्स की सुरक्षा संबंधी चेतावनियों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। डॉ. गौरव सेठ ने सुरक्षा चेतावनियों को सभी रोगियों पर समान रूप से लागू करने का समर्थन किया, जबकि डॉ.प्रवीण जैन ने कम जोखिम वाले रोगियों में व्यक्तिगत मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर दिया। यह सत्र चिकित्सकों के बीच चर्चा का प्रमुख केंद्र रहा।

सम्मेलन के अंतिम वैज्ञानिक व्याख्यान में डॉ.रुतविज मिस्त्री ने ल्यूपस नेफ्राइटिस में एसजीएलटी-2 इनहिबिटर्स की संभावित भूमिका पर जानकारी दी।उन्होंने इसे भविष्य में उपचार का “गेम चेंजर”बताते हुए प्रारंभिक अध्ययनों के सकारात्मक परिणाम साझा किए।

समापन समारोह के दौरान आयोजन समिति ने सभी राष्ट्रीय फैकल्टी,प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में आधुनिक रूमेटोलॉजी,नई शोध दिशा, कृत्रिमबुद्धिमत्ता तथा रोगी- केंद्रित उपचार पद्धतियों पर हुए विचार-विमर्श को अत्यंत उपयोगी बताया गया।

आयोजन अध्यक्ष डॉ.अरविंद जैन एवं आयोजन सचिव डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि आरआरएकोन- 2026 ने राजस्थान सहित देशभर के चिकित्सकों को एक साझा वैज्ञानिक मंच प्रदान किया,जहां अनुभव, शोध और नवाचार का प्रभावी समन्वय देखने को मिला। सम्मेलन का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।