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जोधपुर, शहर की सिटी बसें लंबे समय से बंद पड़़ी हैं जिससे शहर की गरीब जनता को परेशानी का सामना पड़ रहा है। उन्हे अस्पताल या किसी जरूरी काम से जाना है तो टैक्सी करके जाना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जब सरकार ने अपने कमाई के साधन रेल, रोडवेज व प्राइवेट बसों का संचालन शुरू कर दिया है तो सिटी बसों पर पाबंदी जारी रखना गरीबों के अधिकार का हनन है।

जो सफर बीस रुपए में हो जाता था उसके लिए 100-150 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं। कोरोनाकाल में शहर की जनता पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रही है उसके साथ सिटी बसें बंद होने से उनकी जेब पर और भार बढ़ गया है। इसके साथ ही जोधपुर सिटी बसों का एक साल का टैक्स माफ करने और आर्थिक पैकेज देने की मांग भी उठ रही है।

सिटी बसों के संचालक 15 माह से कोरोना महामारी के कारण आर्थिक संकट झेल रहे हैं। बस मालिकों का कहना है कि परिवहन विभाग का टैक्स भी उन्हें कर्जा लेकर चुकाना पड़ा है। यही नहीं इंश्योरेंस का पैसा भी बर्बाद हुआ है। बस मालिकों पर टैक्स, इंश्योरेंस, टायर, मेंटिनेंस, चालक-परिचालक का वेतन आदि का खर्च भी बढ़ गया है।

भविष्य में भी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अभी कोरोना के कारण जो हालत बने हैं, उसको देखते हुए एक साल के लिए टैक्स माफ करने और सभी के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए ताकि सिटी बस मालिक आर्थिक संकट से मुक्त हो सकें।

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