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असल रजिस्ट्री नहीं चुकाने पर उपभोक्ता प्रतितोष आयोग ने बैंक पर जुर्माना

जोधपुर, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (द्वितीय) ने भूखंड खरीदने के पेटे लिए लोन चुकाने के बाद असल रजिस्ट्री नहीं लौटाने को बैंक की सेवा में कमी मानते हुए तीन महीने में उसे लौटाने के आदेश दिए हैं। अगर तीन महीने में असल रजिस्ट्री नहीं लौटाई जाती है तो परिवादी को 50 हजार रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में चुकाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक क्षति आदि के लिए भी भुगतान करने को कहा है।

परिवादी रमेशचंद्र सोनी की ओर से अधिवक्ता अमित माहेश्वरी ने आयोग में परिवाद पेश कर बताया,कि परिवादी व उसकी पत्नी ने वर्ष 2005 में पट्टाशुदा भूखंड क्रय करने के करार व स्वत्व के समस्त दस्तावेजात सहित भूखंड पर ऋण सुविधा के लिए आईडीबीआई बैंक के यहां आवेदन किया। जिस पर समस्त दस्तावेज को सही मानते हुए बैंक द्वारा ऋण स्वीकृत किया गया। बैंक में परिवादी द्वारा सभी दस्तावेज जमा करवा दिए।

असल बेचाननाम बैंक में दिया गया इस पर विक्रेता के हक में चेक जारी किया गया एवं बैंक के पैनल अधिवक्ता ने चेक की फोटो प्रति के आधार पर बेचाननामा पंजीबद्ध करवाया। परिवादी ने असल बेचाननामा बैंक में जमा करवाकर चेक प्राप्त किया। ऋण का पूर्ण भुगतान वर्ष 2013 में होने पर बैंक द्वारा ऋण प्रतितोष भूखंड के संबंध में अन्य दस्तावेज परिवादी को दे दिए, लेकिन सबसे अंतिम असल रजिस्ट्री परिवादी के हक में निष्पादित हुई थी, वो नहीं दी। इस पर परिवादी ने पत्र के नीचे बेचाननामा नहीं होने व तुरंत उपलब्ध कराने के संबंध में अंकन किया। मगर बैंक ने कहा कि ढूंढ़ा जा रहा है। बाद में दस्तावेज नहीं लौटाया। असल दस्तावेज के अभाव में बैंक अधिकारियों द्वारा ऋण देने से इनकार कर दिया गया।

संपत्ति की बाजार दर में भाव कम हुए

संपत्ति की बाजार दर में भाव भी कम हो गए। परिवादी ने बैंक से असल बेचाननामा सुपुर्द करवाने तथा विकल्प में बेचाननामा गुम हो जाने का प्रमाण पत्र जारी करवाने के अलावा 4 लाख 51 हजार रुपए क्षतिपूर्ति राशि दिलवाने के लिए अनुतोष चाहा गया। बैंक की ओर से जवाब दिया गया कि परिवादी द्वारा बेचाननामा निष्पादित करवाकर कभी भी बैंक में जमा नहीं करवाया गया, जिसके कारण बैंक उसे लौटाने में असमर्थ है। आयोग ने दोनों पक्ष सुनने के बाद कहा कि परिवादी द्वारा भूखंड के स्वामित्व के संबंध में जमा करवाया गया विक्रय पत्र तीन महीने की अवधि में उसे लौटाया जाए।

जुर्माना लगाया गया

शारीरिक, मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति तथा परिवाद व्यय के रूप में पंद्रह हजार रुपए अदा करे। तीन महीने में मूल बेचाननामा नहीं लौटाए जाने पर परिवादी क्षतिपूर्ति के रूप में पचास हजार रुपए की राशि प्राप्त करने का अधिकारी होगा।

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