मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर नवज्योति स्कूल में जागरूकता कार्यशाला
- –चुप्पी तोड़ो,सेहत जोड़ो’
- डॉ.सुनीता बोलीं-पीरियड शर्म नहीं,सामान्य प्रक्रिया है
- हमारा साहस ट्रस्ट की पहल -बालिकाओं ने खुलकर पूछे सवाल -झिझक की दीवार टूटी सेनेटरी पैड क्यों जरूरी,बताया डॉ.मालवीय ने
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर नवज्योति स्कूल में जागरूकता कार्यशाला। विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के मौके पर नवज्योति शिक्षण संस्थान की कक्षाएं बुधवार को ‘सेहत की पाठशाला’ बन गईं। हमारा साहस ट्रस्ट द्वारा आयोजित विशेष कार्यशाला में किशोरियों ने पहली बार पीरियड्स पर खुलकर बात की,सवाल पूछे और मिथकों को तोड़ा।
‘ये बीमारी नहीं,शरीर का बदलाव है’:डॉ.सुनीता मालवीय
कार्यशाला की मुख्य वक्ता स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.सुनीता मालवीय ने बेहद सरल भाषा में समझाया, मासिक धर्म कोई बीमारी या अपवित्रता नहीं,बल्कि हर लड़की के बड़े होने की निशानी है। इस दौरान साफ-सफाई न रखना इंफेक्शन को न्योता देता है।
उन्होंने बताया,कपड़े की जगह सेनेटरी पैड हर 4-6 घंटे में बदलना जरूरी है। गीले पैड से रैशेज,UTI और बांझपन तक का खतरा हो सकता है। डॉ.मालवीय ने पोषण, दर्द में राहत के घरेलू उपाय,स्कूल में पैड डिस्पोजल पर भी टिप्स दिए।
बालिकाओं ने तोड़ी चुप्पी: मैम,दर्द में स्कूल आएं या नहीं?’
शुरुआत में सहमी-सकुचाई छात्राएं धीरे-धीरे खुलीं। कक्षा 9 की प्रिया ने पूछा,मैम,पेट दर्द ज्यादा हो तो क्या करें?”कक्षा 10 की अंजलि बोली,घर में कहते हैं पीरियड में अचार मत छुओ,बाल मत धोओ। क्या ये सच है?” डॉ.सुनीता ने हर सवाल का जवाब वैज्ञानिक तरीके से दिया। अचार खराब नहीं होता, बाल धोने से बीमार नहीं पड़ते। ये सिर्फ भ्रम हैं। दर्द ज्यादा हो तो गर्म पानी की थैली, हल्की एक्सरसाइज और डॉक्टर से सलाह लें। स्कूल मिस न करें।
झिझक की जगह जागरूकता जरूरी’: तमन्ना भाटी
कार्यक्रम के अंत में हमारा साहस ट्रस्ट की अध्यक्षा तमन्ना भाटी ने कहा,आज भी गांव-कस्बों में लड़कियां पीरियड पर बात करने से कतराती हैं। चुप्पी बीमारी बढ़ाती है। हमारा मकसद है कि हर बच्ची अपने शरीर को समझे,शर्म नहीं गर्व करे। उन्होंने डॉ.सुनीता मालवीय, प्राचार्या नीरू रानी शीत पूरी टीम का आभार जताया।
एआई आकलन के तहत 16 मई को होगी विशेष अभिभावक- शिक्षक बैठक (PTM)
छात्राओं ने कहा आज पहली बार खुलकर समझ आया। कक्षा 8 की रितिका बोली,पहले मां से भी नहीं पूछ पाते थे। आज मैम ने इतनी आसानी से समझाया कि डर निकल गया। प्राचार्या नीरू रानी ने कहा,स्कूल में ऐसी कार्यशाला हर 6 महीने में होनी चाहिए। स्वस्थ बच्ची ही स्वस्थ समाज* बनाएगी।
आंकड़े बोलते हैं: NFHS-5 के मुताबिक राजस्थान में 15-24 साल की 49% लड़कियां ही हाइजीनिक तरीके अपनाती हैं। ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा और कम है।
नवज्योति स्कूल की दीवारों ने बुधवार को एक खामोशी टूटते देखी। जब वो वाले दिन पर बात हुई तो डर की जगह जानकारी ने ली। हमारा साहस ट्रस्ट की यह पहल बता गई कि पीरियड पर चर्चा गंदी बात नहीं,जरूरी बात है। क्योंकि जागरूकता ही पहला सेनेटरी पैड है।
