Agricultural University's initiative for the conservation of the state animal, the camel.

राज्य पशु ऊंट के संरक्षण में कृषि विवि की पहल

-दूध संग्रहण केंद्र बनेंगे -चरागाहों को किया जाएगा विकसित

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),राज्य पशु ऊंट के संरक्षण में कृषि विवि की पहल। धोरों की शान और प्रदेश की संस्कृति के गौरव राज्य पशु ऊंट के अस्तित्व पर लगातार संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान में लंबे समय तक आजीविका के मुख्य साधन रहे ऊंटों की संख्या में गंभीर गिरावट आ रही है।

इसी को देखते हुए कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर विरेन्द्र सिंह जैतावत की पहल पर ऊंट संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। इसकी पहली शुरुआत विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र गुड़ामालानी से की जाएगी। इसके तहत न सिर्फ स्थानीय लोगों को जागरूक किया जाएगा अपितु विविध प्रयासों के तहत इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जाएगा।

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कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत ने बताया कि खेती और परिवहन में आधुनिक वाहनों का उपयोग एवं चरागाहों की लगातार घटती संख्या से न सिर्फ ऊंट पर संकट आया बल्कि हमारी मरुस्थलीय अर्थव्यवस्था एवं पर्यावरण भी प्रभावित हुआ।

उन्होंने बताया अब इस दिशा में काम करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र गुड़ामालानी से शुरुआत करते हुए राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र बीकानेर के सहयोग से विभिन्न प्रोजेक्ट के तहत चारागाह जमीन को विकसित किया जाएगा। साथ ही उष्ट्र पालकों में जागरूकता बढ़ाकर सरकार की ओर प्रदत विभिन्न सरकारी योजनाओं से भी उन्हें जोड़ा जायेगा।

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दूध के उत्पादों को दिया जाएगा प्लेटफार्म कृषि विज्ञान केंद्र,गुड़ामालानी के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ प्रदीप पगारिया ने बताया कि संरक्षण की दिशा में आय संवर्धन करना सबसे महत्वपूर्ण है। इसके लिए केंद्र की ओर से पोषक तत्वों से भरपूर सुपर फूड, ऊंटनी के दूध का संग्रहण केंद्र बनाकर एवं उसका मूल्य संवर्धन कर विभिन्न उत्पादों को बनाया जाएगा।

इससे न सिर्फ ऊंट पालकों को प्लेटफार्म मिलेगा बल्कि केंद्र के सहयोग से मार्केटिंग होने से कमाई का जरिया भी बढ़ेगा। इस के अतिरिक्त ऊंट के बालों से बने उत्पादों (कालीन,बैग) को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में पहचान दिलाने के लिए सहायता प्रदान की जायेगी।

इस परियोजना के तहत राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र,भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी,पशुपालन विभाग, विभिन्न एनजीओ, एफपीओ,कॉरपोरेट सेक्टर सहित कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर पहली कार्यशाला का आयोजन कर रोड मैप भी तैयार कर लिया गया है।

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