राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए धोखाधड़ी के मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश
फर्जी गारंटर बनाकर लोन लेने का मामला
जोधपुर,राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए धोखाधड़ी के मामले में निष्पक्ष जांच के आदेश।राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर के न्यायाधीश कुलदीप माथुर द्वारा आपराधिक एकल पीठ याचिका की सुनवाई करते हुए धोखाधड़ी के प्रकरण में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। याची गजेंद्र जोशी के अधिवक्ता प्रवीण दयाल दवे ने बताया कि परिवादी से दवाई की दुकान लगाने के लिए जनता मेडिकल हॉल के प्रियांक मेहता ने संपर्क किया था। पश्चात गजेंद्र ने प्रियांक और हर्षलता मेहता को बी फार्मा का लाइसेंस,रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र,पैन कार्ड की कॉपी,आधार कार्ड की कॉपी बिना किसी हस्ताक्षर किए दिए थे जिसमें से मूल दस्तावेज प्रियांक ने लौटा दिए थे,मेहता ने सभी दस्तावेजों की फोटो कॉपी का दुरुपयोग कर, परिवादी के कूटरचित हस्ताक्षर कर, मार्स फाइनेंस कंपनी के मैनेजर एवं कर्मचारीयों से मिलीभगत कर 1,94,226 रुपए का ऋण उठा लिया। जिसकी मासिक किस्त 6,338 रुपए रखी गई,जो कुल 36 माह के अंतराल में अदा करने थे,जिसमें बिना किसी सूचना,बिना किसी सहमति व बिना हस्ताक्षर किए ही परिवादी को को-गारंटर बना दिया गया। जिसकी जानकारी उसे कंपनी का नोटिस मिलने पर प्राप्त हुई।
यह भी पढ़ें – जनकल्याणकारी योजनाओं को दर्शाती मोबाइल एलईडी वैन रवाना
इस संदर्भ में जनता मेडिकल पर संपर्क कर घटना की जानकारी देने पर पहले तो उसे मामला सेटल करने को बोला फिर कहा कि अगर ज्यादा पंचायती की तो प्रियांक की पत्नी आप पर एफआइआर करवा देगी। पश्चात न्यायालय के आदेश पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने पर भी पुलिस द्वारा फाइनेंस कंपनी से कुटरचित दस्तावेज बरामद न करने एवं स्वतंत्र निष्पक्ष अनुसंधान न करने पर राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष कुटरचित दस्तावेजों को एफएसएल जांच के लिए भिजवाने, फर्जी दस्तावेज बरामद कर कार्रवाई करने,स्वतंत्र-निष्पक्ष अनुसंधान करने के लिए याचिका प्रस्तुत की गई जो स्वीकार कर न्यायालय द्वारा अभियुक्त प्रियांक मेहता,हर्षलता मेहता,मयंक मेहता,कुशाल मेहता,मार्स फाइनेंस के मैनेजर,कर्मचारी व अन्य के विरुद्ध स्वतंत्र व निष्पक्ष अनुसंधान करने के आदेश पारित करते हुए पुलिस अधीक्षक जोधपुर व अनुसंधान अधिकारी के समक्ष 15 दिनों के भीतर अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के आदेश देते हुए चार सप्ताह के भीतर विधि पूर्वक अभ्यावेदन का निस्तारण करने की आदेश पारित किए गए हैं। सरकार की ओर से श्रवण कुमार और याची की ओर से प्रवीण दयाल दवे एडवोकेट द्वारा पक्ष रखा गया है।
दूरदृष्टि न्यूज की एप्लिकेशन यहां से इंस्टॉल कीजिए – http://play.google.com/store/apps/details?id=com.digital.doordrishtinews
