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मोटरयान दुर्घटना दावा में सात साल पूर्व दायर जनहित याचिका का निस्तारण

जोधपुर,राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मोटर यान दुर्घटना दावा अधिकरणों में स्टाफ और अन्य सुविधाओं बाबत सात साल पूर्व दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए वरिष्ठ न्यायाधीश विजय बिश्नोई और न्यायाधीश प्रवीर भटनागर ने राज्य सरकार को निर्देश दिए है कि अधिकरणों और अन्य न्यायालयों, जिन्हें अधिकरण का अतिरिक्त प्रभार दिया है,वहां पर पर्याप्त मात्रा में स्टाफ की नियुक्ति करें और हाईकोर्ट प्रशासन को भी निर्देश दिए है कि वे दो सप्ताह में एसओपी जारी कर सभी संबंधित न्यायालयों को निर्देशित करें कि दावेदारों को दावा राशि भुगतान वितरण बिना किसी देरी के किया जाए।

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जिला अभिभाषक संघ,बांसवाड़ा की जनहित याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता अनिल भंडारी ने कहा कि वर्ष 2016 में डाक से प्राप्त प्रतिवेदन को राजस्थान उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर समय समय पर न्यायालय ने राज्य सरकार और हाईकोर्ट को निर्देश जारी किए और अधिकांश अधिकरण में लेखाधिकारी और स्टेनोग्राफर नियुक्त किए गए,लेकिन राज्य के 111 न्यायालयों को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है,वहां पर पर्याप्त मात्रा में मिनिस्ट्रीयल स्टाफ नहीं होने से न्यायिक कार्य बाधित हो रहा है।उन्होंने कहा कि दो साल पहले उन्होंने न्यायालय का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया था कि जोधपुर महानगर में दावेदारों को 8 से 10 माह तक अवार्ड राशि वितरण नहीं किया जा रहा है और बैंक में आठ करोड़ रुपए राशि अवितरित पड़ी है,जिसे गंभीरता से लेकर सभी अधिकरणों में लेखाधिकारी नियुक्त किए जाने के निर्देश दिए गए और जोधपुर महानगर से भुगतान वितरण लंबित की तुलनात्मक तालिका पेश करने के निर्देश पर आनन फानन में सभी भुगतान किए गए।

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राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अतिरिक्त महाधिवक्ता संदीप शाह ने कहा कि अधिकांश अधिकरण में स्टेनोग्राफर और लेखाधिकारी की नियुक्ति कर दी गई है। हाईकोर्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डा सचिन आचार्य ने कहा कि हाईकोर्ट ने सुझावों के मद्देनजर एसओपी तैयार कर दी है और वर्तमान में सभी जगह समय पर दावा राशि वितरित की जा रही है। खंडपीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश विजय बिश्नोई और न्यायाधीश प्रवीर भटनागर ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए कहा कि सात साल पहले अधिकरणों में अपर्याप्त स्टाफ था और न्यायालय ने समय समय पर कई निर्देश दिए,तब स्टेनोग्राफर,लेखाधिकारी,लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त किए गए। उन्होंने कहा कि तत्समय 26 अधिकरण में 35 हजार 160 मामले लंबित थे और बाद में 111 न्यायालयों को दुर्घटना दावा अधिकरण का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर लंबित प्रकरण की संख्या 72 हजार 871 हो गई। उन्होंने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि अधिकरणों और उन सभी न्यायालयों में जिन्हें अधिकरण का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है,वहां पर रिक्तियां होने पर भर्ती की जाए ताकि न्यायालय कार्य बाधित न होकर सुचारू रहे। उन्होंने हाईकोर्ट को निर्देश दिए कि दो सप्ताह में एसओपी तैयार कर सभी अधिकरण और संबंधित न्यायालयों को निर्देशित करें कि दावेदारों को दावा राशि तत्काल वितरित हो जाए।

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