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जोधपुर, महात्मा गांधी अस्पताल में पहली बार हुआ ऐक्सिस हड्डी का ऑपरेशन। मस्तिष्क के ठीक नीचे स्थापित यह हड्डी रीढ़ की हड्डी का सबसे महत्वपूर्ण जोड़ बनाती है, जैसलमेर निवासी भीमाराम के एक सड़क दुर्घटना में इस हड्डी का फ्रैक्चर हो गया था,सामान्य एक्सरे करके देखने पर इस तरह के फ्रैक्चर कई बार नजर नहीं आते हैं। मरीज के गर्दन के ऊपरी हिस्से में असहनीय दर्द लगातार बना हुआ था, गर्दन की सीटी स्कैन व एमआरआई करने पर पता चला कि एक्सिस नाम की हड्डी का एक ज्वाइंट टूट गया है जिसे ओडोनटाइड नाम से जाना जाता है।

एमजीएच एक्सिस हड्डी ऑपरेशन

सिर की हर तरफ की मूवमेंट का केंद्र बिंदु इसी ज्वाइंट पर रहता है, इसी ज्वाइंट के ठीक पीछे स्पाइनल कॉर्ड का सबसे ऊपरी हिस्सा रहता है, जिस पर मामूली दबाव भी जानलेवा हो सकता है,जब तक ऑपरेशन करके इस ज्वाइंट को फिक्स नही किया जाता तब तक गर्दन की कोई भी अवांछित मूवमेंट नस को दबा सकती है। इन सब खतरों को ध्यान में रखते हुए मरीज के सिर में एक खास तरह का खिंचाव यंत्र को पुली की सहायता से लगाया जाता है तथा उस पर वजन लटका कर सिर को स्थिर रखा जाता है।

फिर ऑपरेशन के द्वारा गर्दन के मध्य में सर्जिकल चीरा लगाकर, गर्दन की गहराई में सिर के ठीक निचले हिस्से तक पहुंचा जाता है फिर एक्सरे की दो मशीनों में जीरो डिग्री एवं नब्बे डिग्री पर एक साथ देखते हुए,विभिन्न कोणों पर सामंजस्य बैठाते हुए स्क्रू लगाया जाता है। 6 से 7 एमएम के हड्डी के टुकड़े में 4.5 एमएम का स्क्रू लगा कर हड्डी को फिक्स किया जाता । इस हड्डी के टुकड़े के चारों तरफ मानव शरीर के सबसे जटिल सरंचनाए पाई जाती है (मस्तिष्क,सांस की नली, ग्रसनी, मस्तिष्क को जाने वाली खून की नस एवं विभिन्न नसे )इन सब जटिलताओं के चलते ये ऑपरेशन अपने आप में एक अव्वल दर्जे की सर्जिकल दक्षता वाले ऑपरेशन की श्रेणी में शुमार है। यह ऑपरेशन मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में निशुल्क हुआ।

यह ऑपरेशन अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ महेश भाटी के मार्गदर्शन में स्पाइन सर्जन डॉक्टर महेंद्र सिंह टाक की टीम ने किया। सर्जिकल टीम में डॉ नंदलाल,डॉ पूनमचंद,डॉ जयेश थे। एनेस्थीसिया इंचार्ज डॉ सरिता जनवेजा ने बताया कि इस तरह के मरीजों को बेहोश करते अत्यंत सावधानी रखनी पड़ती है, गर्दन में किसी भी तरह की मूवमेंट जानलेवा हो सकती है। इसके लिए इन मरीजों में बेहोशी के लिए एक खास तरह के फाइबर ऑप्टिक मशीन का उपयोग किया जाता है, इस टीम में डॉ फतेहसिंह भाटी,डॉ गायत्री,डॉ नीलम, डॉ प्रियमवदा,डॉ ब्रजमोहन ओटी इंचार्ज इकबाल कायमखानी, अजीत गुरनानी एवं अर्जुन सिंह सोढा का सहयोग रहा।

विभागाध्यक्ष डॉ. महेश भाटी ने बताया कि इस तरह का ऑपरेशन डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग विभाग में पहली बार हुआ है जो विभाग के लिए एक उपलब्धि है। अस्पताल अधीक्षक डॉ राजश्री बेहरा ने ऑपरेशन टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी। मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ एसएस राठौड़ ने बताया की इस तरह के जटिलतम ऑपरेशन की सुविधा जोधपुर ही नही सम्पूर्ण पश्चिम राजस्थान के लिए एक वरदान है। मुख्यमंत्री के निरोगी राजस्थान की परिकल्पना के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है। महात्मा गांधी अस्पताल में ऑर्थो स्पाइन यूनिट की स्थापना से यहां रीढ़ की हड्डी के इलाज के नए आयाम स्थापित होंगे।

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