- सादगी के मिसाल थे डॉ खेत लखानी
- महापौर रहते हुए सरकारी गाड़ी में कभी भी पत्नी को नही बैठाया
- सरकारी वाहन का उपयोग स्वयं भी 10 से 5 बजे तक ही करते थे
- निजी कार्य के लिए टेम्पो में जाते थे
- कार्यकर्ता को भी काम के लिए भेजने के लिए टेम्पो का किराया देते थे
- कार्यकर्ता यदि किराया नही ले तो उसे कार्य करने को मना कर देते थे
जोधपुर, शहर के प्रथम महापौर डॉ खेत लखानी का रविवार सुबह निधन हो गया। उनके निधन की खबर से जोधपुर शहर में शोक की लहर छा गई। सादगी का पर्याय खेत लखानी 101 वर्ष के थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार खेत लखानी ने परिजनों को पहले ही बताया हुआ था कि कोरोना के मद्देनजर ज्यादा लोगों को सूचना नही दिया जाए। इसलिए उनका अंतिम संस्कार कम लोगों की उपस्थिति में कर दिया। महापौर बनने के बाद यदि कमरे में वे अकेले होते बिजली बचत के लिए पंखा बंद कर दिया करते थे। उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी में अपनी पत्नी को भी कभी नही बैठाया और वे स्वयं सरकारी गाड़ी का उपयोग 10 से 5 बजे तक ही किया करते थे। नगर निगम में उनसे मिलने आने वालों को अपने पैसे से चाय पिलाते थे। स्वयं भी निजी कार्य के लिए सरकारी वाहन का उपयोग नही करते और यदि अपने काम से किसी कार्य कर्ता को खिं भेजना होता तो उसे टेम्पो का किराया देते थे और उसने किराया लेने से मना कर दिया तो उससे काम भी नही करवाते थे। दो साल पहले नगर निगम ने बकाया यूडी टेक्स वसूलने का विशेष अभियान चलाया, डॉ खेत लखानी को इसका पता चलने पर उन्होंने अपने मकान के टेक्स के बारे में पता कर निगम की टीम को फोन कर बुलाया और उन्हें पौने दो लाख का चेक सौंप दिया।