टेण्डर लेने वाली फर्म से धोखाधड़ी का आरोप
- सरकारी आवासीय योजना के फ्लैट्स में दरवाजे लगाने का मामला
- 702 दरवाजों का ऑर्डर लिया
- 351 देकर सात लाख हड़पने का आरोप
- बाप बेटे के खिलाफ केस दर्ज
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),टेण्डर लेने वाली फर्म से धोखाधड़ी का आरोप। सरकारी आवासीय योजना के फ्लैट्स में दरवाजे लगाने का ठेका लेकर लकड़ी के दरवाजों की सप्लाई में धोखा धड़ी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक फर्म ने 702 दरवाजों का ऑर्डर देने के बाद 351 दरवाजे ही सप्लाई किए और इसके बदले 7.05 लाख रुपए का भुगतान लेने के बावजूद बाकी दरवाजे नहीं दिए। बकाया माल की मांग करने पर कारोबारी मुकेश शर्मा को धमकियां दी गईं।
पीडि़त की शिकायत पर राजीव गांधी नगर थाना पुलिस ने दो आरोपियों इंदौर निवासी जसबीर और उसके बेटे सन्नी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। इधर,दरवाजे नहीं मिलने से सरकारी प्रोजेक्ट का काम अटक गया। उसे करीब 4 से 5 लाख रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। शेष दरवाजे दूसरी फर्म से बनवाने पर करीब 2 से 3 लाख रुपए अतिरिक्त खर्च होने और लेबर के दोबारा इंतजाम के कारण भी नुकसान हुआ।
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राजीव गांधी नगर पुलिस ने बताया कि परिवादी मुकेश शर्मा ने इस्तगासा पेश कर रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि फर्म जगदीश प्रसाद एंड कंपनी निर्माण कार्यों की ठेकेदार है। फर्म को महात्मा गांधी आवासीय योजना के तहत एचआईजी और ईडब्ल्यू एस श्रेणी के फ्लैट्स में दरवाजे लगाने का काम मिला था। इसके लिए परिवादी ने एमपी वुड प्रोडक्ट फर्म के संचालक शनि पुत्र जसवीर सिंह से संपर्क किया।
बातचीत के बाद 23 मई 2026 को कुल 702 दरवाजे तैयार कर सप्लाई करने का ऑर्डर दिया गया। दरवाजे 30 एमएम की लकड़ी से 90 रुपए प्रति वर्गफीट की दर से बनाने और 30 जुलाई तक डिलीवरी देने की सहमति हुई। परिवादी का आरोप है कि आरोपी ने 23 जून को 351 दरवाजे सप्लाई किए और इनकी एवज में 7 लाख 5 हजार 427 रुपए का भुगतान भी आरटीजीएस के जरिए कर दिया गया।
रुपए लिए,बाकी दरवाजे के लिए टालमटोल जवाब
351 दरवाजों की सप्लाई बाकी थी। आरोपी ने भरोसा दिलाया था कि तय समय में सभी दरवाजे दे दिए जाएंगे,लेकिन इसके बाद लगातार टालमटोल शुरू कर दी। आरोपी ने दरवाजों की कीमत 90 रुपए से बढ़ाकर 93 रुपए प्रति वर्ग फीट करने की बात कही। इसके बावजूद शेष माल की डिलीवरी नहीं की। 20 अगस्त को आरोपी ने दरवाजों की सप्लाई के लिए 1.50 लाख रुपए की मांग की। परिवादी ने बताए गए बैंक खाते में आरटीजी एस से यह राशि भी जमा करवा दी, लेकिन इसके बाद भी दरवाजे नहीं मिले।
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