बच्चों को भी हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक लक्षणों को न करें नजरअंदाज: डॉ.प्रदीप जैन
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बच्चों को भी हो सकता है ब्रेन स्ट्रोक लक्षणों को न करें नजरअंदाज:डॉ. प्रदीप जैन। आमतौर पर माना जाता है कि ब्रेन स्ट्रोक केवल बुजुर्गों को होता है,लेकिन यह नवजात शिशुओं,बच्चों और किशोरों को भी हो सकता है। यह मस्तिष्क की रक्तवाहिका में रुकावट या रक्तस्राव से होने वाली गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति है। समय पर पहचान और उपचार से मस्तिष्क को होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है।
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वरिष्ठ शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.प्रदीप जैन ने बताया कि बच्चों में स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने में अक्सर देरी हो जाती है,क्योंकि अभिभावक इस उम्र में स्ट्रोक की आशंका नहीं करते। अचानक चेहरे का एक तरफ टेढ़ा होना,शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, बोलने या समझने में परेशानी,दृष्टि में बदलाव और चलते समय संतुलन बिगड़ना इसके चेतावनी संकेत हैं। अचानक तेज सिरदर्द,उल्टी,अत्यधिक सुस्ती या पहली बार दौरा पड़ने पर भी तुरंत चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
BE FAST से पहचानें लक्षण
डॉ.जैन ने बताया कि स्ट्रोक की पहचान के लिए BE FAST फॉर्मूला याद रखें।
-B-Balance: अचानक संतुलन बिगड़ना
-E-Eyes: देखने में परेशानी
-F-Face: चेहरे का एक हिस्सा लटकना
-A-Arm: एक हाथ या शरीर के एक तरफ कमजोरी
-S-Speech: बोलने या समझने में कठिनाई
-T-Time: बिना देरी आपातकालीन सहायता लेना
नवजात शिशुओं में शरीर के एक हिस्से में बार-बार दौरे आना,एक हाथ-पैर की गतिविधि कम होना या इतनी सुस्ती कि बच्चा दूध पीने के लिए भी न जागे,गंभीर संकेत हो सकते हैं।
जन्मजात हृदय रोग, सिकल सेल रोग,रक्त के थक्के बनने की गड़बड़ी, मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की बीमारियां और कुछ संक्रमण बच्चों में स्ट्रोक के कारण बन सकते हैं। पहले से कोई बीमारी न होने पर भी स्ट्रोक की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अभिभावक क्या करें?
लक्षण शुरू होने का समय और बच्चा आखिरी बार कब सामान्य था,यह नोट करें। तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या निकटतम आपातकालीन विभाग पहुंचें। लक्षण अपने आप ठीक होने पर भी जांच में देरी न करें। बच्चे को स्वयं एस्पिरिन या अन्य दवा न दें और खाने-पीने को कुछ न दें।
अस्पताल में ब्रेन स्कैन और अन्य जांचों के आधार पर उपचार तय होता है। स्ट्रोक के बाद फिजियो थेरेपी,स्पीच थेरेपी और नियमित फॉलो-अप बच्चे की कार्यक्षमता सुधारने में महत्वपूर्ण है।
डॉ.जैन ने कहा: अचानक चेहरे,हाथ या बोली में बदलाव दिखे तो बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।
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