सुप्रीम कोर्ट का आसाराम को जमानत देने से इनकार

कहा-जीवन को खतरा हो, तभी विचार करेंगे -राजस्थान सरकार से जवाब तलब

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),सुप्रीम कोर्ट का आसाराम को जमानत देने से इनकार। अपने ही आश्रम की नाबालिग छात्रा से यौन शोषण के दोषी आसाराम द्वारा दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है,जिसमें साल 2013 के नाबालिग से रेप मामले में उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने आसाराम की सजा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के सीनियर वकील डीएस नायडू ने दलील दी कि आसाराम की उम्र 80 साल से अधिक है और वे कई गंभीर बीमारियों से पीडि़त हैं।

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इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जेल प्रशासन को आसाराम के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा- फिलहाल हम जमानत नहीं दे रहे हैं। राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद यदि ऐसी गंभीर स्थिति सामने आती है,जिससे उनके जीवन को खतरा हो,तभी जमानत पर विचार किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी आसाराम की सजा
दरअसल राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को फैसले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि,अदालत ने आसाराम को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और पॉक्सो अधिनियम के तहत सामूहिक गैंगरेप और बच्चे के साथ गंभीर यौन उत्पीडऩ से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने आसाराम को आईपीसी की धारा 376(डी),पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(जी)/6 और आईपीसी की धारा 120(बी) (आपराधिक साजिश) के आरोपों से भी मुक्त कर दिया था।

हालांकि,अदालत ने आईपीसी की धारा 376(2)(एफ) (नाबालिग से रेप) के तह दोषसिद्धि को बरकरार रखा,जिसके चलते ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा यथावत रही। वहीं हाईकोर्ट ने इस मामले में सह- आरोपी संचिता गुप्ता उर्फ शिल्पी और शरत चंद्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया था।