कैबिनेट मंत्री के गांव में पानी मांगने पर ग्रामीणों पर एफआईआर
- राजकार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज
- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कसा तंज
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),कैबिनेट मंत्री के गांव में पानी मांगने पर ग्रामीणों पर एफआईआर। भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों द्वारा कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल के लूणी विधानसभा क्षेत्र के धुंधाड़ा गांव में पानी की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के बाद मामला तूल पकड़ गया है। प्रदर्शन को लेकर जलदाय विभाग के सहायक अभियंता ने ग्रामीणों के खिलाफ राजकार्य में बाधा का मामला दर्ज करवाया है।
पानी की मांग पर मामला दर्ज होने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पानी मांगोगे तो जेल जाओगे।
दरअसल एक सप्ताह पहले पानी की मांग को लेकर ग्रामीणों ने धुंधाड़ा गांव में प्रदर्शन किया था। इस दौरान महिलाओं ने विरोध स्वरूप मटकिया फोड़ी थीं। इसको लेकर सहायक अभियंता ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ग्राम धुन्धाडा में लगभग 60 प्रतिशत गांव की पेयजल सप्लाई 14,15,16,24 और 25 मई को कर दी थी। बची हुई आपूर्ति 27,28 मई को होनी थी,लेकिन 27 मई की सुबह जानबूझकर कुछ व्यक्ति विशेषों ने बिना किसी अनुमति के पानी नहीं आने की बात बताकर रास्ता रोक राजकार्य में बाधा पहुंचाई थी।
शहर के विभिन्न स्थानों से बाइक व मोपेड चोरी
इस मामले में हनुमान राम, शांतिलाल माली,हीराराम मीणा,रमेश माली,ओमा राम मेघवाल और दयाराम को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी इस घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मंत्री के गांव में लोगों ने पानी मांगा,मिली एफआईआर..जैसे संदेश तेजी से वायरल हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने केवल पेयजल संकट के समाधान की मांग की थी,जबकि विभाग का पक्ष है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कार्य में व्यवधान उत्पन्न हुआ। मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का दौर जारी है। ग्रामीणों ने पेयजल समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते हुए दर्ज मुकदमों पर भी पुनर्विचार की मांग की है।
पानी मांगोगे तो जेल जाओगे
इसी घटना पर पूर्व सीएम गहलोत ने हमला बोलते हुए कहा कि पानी मांगोगे तो जेल जाओगे।राजस्थान में भाजपा सरकार का नया डबल इंजन सर्कस है। जोधपुर के धुंधाड़ा गांव में ग्रामीणों ने कैबिनेट मंत्री और इसी गांव के निवासी जोगाराम पटेल के सामने पानी की किल्लत की समस्या रखी और पानी दिलाने की मांग की थी। मंत्रीजी पानी तो नहीं दिला सके,उल्टा जलदाय विभाग ने ग्रामीणों पर राजकार्य में बाधा डालने की एफआई आर दर्ज करवा दी। क्या वे जनता की इस मूलभूत आवश्यकता को भी पूरा नहीं कर सकते?
गहलोत ने आगे लिखा-यह दिखाता है कि सत्ता के मद में सरकार के मंत्रियों और प्रशासन की मति भ्रष्ट हो चुकी है।इससे पूर्व में भी जब मंत्री जोराराम कुमावत से पेयजल की मांग की गई थी,तब गांववालों के बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए गए थे।
प्रदर्शन गांव में,मामला दर्ज करवाया विभाग ने
खास बात यह भी है कि सहायक अभियंता ने राजकार्य में बाधा का आरोप लगा मुकदमा दर्ज करवाया है.लेकिन यह प्रदर्शन विभाग के कार्यालय में नहीं होकर गांव के अंदर हुआ था, जहां आस-पास कोई विभाग भी नहीं था,न ही कोई राजकार्य था, इसके बावजूद जलदाय विभाग द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया गया।
सामान्यत: ऐसे मामलों में पुलिस ही रास्ता रोकने पर मुकदमा दर्ज करती है. लेकिन जलदाय विभाग इस मामले में सरकारी पक्ष बना है,जब मुकदमा दर्ज करवाने वाले जलदाय विभाग के सहायक अभियंता मानसिंह धाकड़ से बात की,तो उनका कहना था कि प्रदर्शन गांव में हुआ था,लेकिन पेयजल को लेकर बनी एक कमेटी के निर्णय के आधार पर लूणी पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया है। मामले की जांच सब इंस्पेक्टर गोविंद सिंह को सौंपी गई हैं।
