आकाशवाणी जोधपुर ने वॉकथोन से दिया ‘आवाज का संदेश’

  • रेडियो के 90 साल
  • 13 मई को बृहस्पति सभागार में गूंजेंगे भजन- गजल की महफिल सजेगी
  • आकाशवाणी से मटकी चौराहा तक चला कारवां -क्लस्टर हेड राजेंद्र नाहर बोले ‘रेडियो आज भी जन-जन की धड़कन’ -अनूपराज पुरोहित के भजन
  • आमिर हुसैन की गजलों से सजेगी शाम

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आकाशवाणी जोधपुर ने वॉकथोन से दिया ‘आवाज का संदेश’।ये आकाशवाणी है-90 साल से घर-घर गूंजने वाली यह आवाज मंगलवार को जोधपुर की सड़कों पर कदम-ताल करती दिखी।आकाशवाणी स्थापना के 90 वर्ष पूरे होने पर आकाशवाणी जोधपुर ने वॉकथोन निकालकर रेडियो के सुनहरे सफर को सलाम किया।

रेडियो की यादें,सड़कों पर कदम
क्लस्टर प्रमुख एवं उप महानिदेशक राजेंद्र नाहर के नेतृत्व में सुबह आकाशवाणी भवन से मटकी चौराहा तक वॉकथोन निकली। हाथों में 90 साल बेमिसाल,रेडियो बोले दिल से लिखी तख्तियां,जैकेट पर आकाशवाणी का लोगो और जुबां पर पुराने जिंगल। कर्मचारियों, श्रोताओं और कॉलेज छात्रों ने मिलकर बताया कि FM और पॉडकास्ट के दौर में भी रेडियो की खरखराहट में अपनापन जिंदा है।

नाहर ने कहा कि 90 साल में रेडियो ने आजादी का बिगुल भी बजाया और किसान-जवान की आवाज भी बना। वॉकथोन का मकसद युवा पीढ़ी को रेडियो की विरासत से जोड़ना है। सालभर ऐसे आयोजन चलते रहेंगे।

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13 मई को ‘स्वरोत्सव’ में भजन-गजल की शाम
जश्न की अगली कड़ी में 13 मई को जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के बृहस्पति सभागार में स्वरोत्सव होगा। शाम 6 बजे से सुगम संगीत संध्या में आकाशवाणी के मान्यता प्राप्त कलाकार सुर बिखेरेंगे।

ये देंगे प्रस्तुति
भजन:- जोधपुर के प्रसिद्ध अनूपराज पुरोहित-रामधुन से मीरा के पद तक

गजल:-आमिर हुसैन- चुपके-चुपके रात दिन से नई रचनाएं तक

संगत:-राजन द्वारका तबले पर,दीपक बोहरा बांसुरी पर

कॉलेजों में भी गूंजी रेडियो की गूंज
नाहर ने बताया कि 90वें वर्ष के उपलक्ष्य में जोधपुर के कई कॉलेजों में क्विज, वाद-विवाद,वॉइस ऑफ यूथ जैसे कार्यक्रम करवाए गए। विजेताओं को प्रमाण पत्र देकर रेडियो से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। कई युवाओं ने कहा कि पहली बार MW-SW बैंड के बारे में जाना,नाहर मुस्कुराए।

90 साल का सफर में बिनाका गीतमाला से मन की बात तक
8 जून 1936 को इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस का नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो-आकाश वाणी हुआ था। जयमाला, हवा महल,फौजी भाइयों के लिए,कृषि दर्शन से लेकर मन की बात तक-रेडियो हर दौर में साथ चला। जोधपुर केंद्र 1965 में शुरू हुआ और मारवाड़ी लोक संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाया।

निष्कर्ष
मोबाइल के नोटिफिकेशन के बीच जब ‘नमस्कार, फरमाइशी गीतों का प्रोग्राम लेकर हाजिर हूं’ गूंजता है, तो दिल ठहर जाता है। आकाशवाणी का 90वां साल सिर्फ एक संस्थान का नहीं, करोड़ों यादों का उत्सव है। वॉकथोन और स्वरोत्सव बता रहे हैं कि रेडियो बूढ़ा नहीं हुआ,बस और क्लासिक हो गया है।