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जोधपुर की गीता की गुजरात में संदिग्ध हालात में मौत

  • पति गुजरात पुलिस में हैडकांस्टेबल
  • गुजरात पुलिस पति को बचाने के प्रयास में जुटी
  • कागजी कार्रवाई गुजराती में करवाने का बनाया दबाव
  • स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जोधपुर की गीता की गुजरात में संदिग्ध हालात में मौत। तेरह साल पहले गुजरात ब्याही जोधपुर की गीता की गत 15 अप्रैल को संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। गुजरात पुलिस ने फंदा लगाकर जान देना बताया,पीहर पक्ष का आरोप है कि उसे तंग और परेशान किया जाता था। उसे मारा गया और फंदे पर लटकाया गया।

मृतका गीता का पति गुजरात पुलिस में हैड कांस्टेबल है और गुजरात पुलिस उसे बचाने का प्रयास कर रही है। इतना ही नहीं गुजरात पुलिस ने कार्रवाई भी गुजराती भाषा में करने का दबाव बनाया है। मृतका को न्याय मिले इसके लिए परिजन ने आज प्रेसवार्ता में गुजरात पुलिस पर आरोप लगाए है। पति हैडकांस्टेबल अर्जुन सिंह राजपुरोहित है। इस लापरवाही के चलते आरोपी के फरार होने के आरोप भी गुजरात पुलिस पर लगाए गए है। मृतका के भाई पाल रोड निवासी नत्थूसिंह उर्फ नवीन राजपुरोहित ने गुजरात पुलिस पर कई आरोप लगाए।

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सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देने का आरोप 
प्रेस वार्ता में मृतक के भाई ने बताया कि पुलिस में कार्यरत उसके बहनोई ने सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया और फांसी खाकर आत्महत्या करने की जानकारी परिजनों को दी,लेकिन मौके पर न तो पुलिस को बुलाया और न ही एफएसएल टीम को। खुद ही फांसी से उतार कर अस्पताल लेकर गया और डाक्टरों के मृत घोषित करने पर पीहर पक्ष को सूचित किया।

तेरह साल पहले हुई थी शादी 
उसकी बहन की शादी तेरह वर्ष पूर्व अर्जुन सिंह के साथ हुई थी और उसके एक पुत्री और एक पुत्र भी है जिनको भी परिजनों से इस घटना के बाद मिलने नहीं दिया गया। परिजन जब बेटी गीता की मौत की सूचना पर अहमदाबाद स्थित उसके मकान जीवराज पार्क सोसायटी पर पहुंच, तो मौका ए हालात संदिग्ध लगे। उन्होंने संबंधित थाने में रिपोर्ट दी,जिस पर मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करागया,लेकिन दुर्भाग्य रहा कि घटना के बाद परिजन गीता के पति और परिजनों के खिलाफ रिपोर्ट लेकर थाने गए थे मगर आला अधिकारियों के यहां भटकाते रहे बाद में 24 अप्रैल को उसका मुकदमा दर्ज किया गया।

भांजे की बीमारी से आत्महत्या करना बताया 
मृतका के भाई ने बताया कि ससुराल वाले उसकी बहन की मौत को भांजे की बीमारी से परेशान होकर आत्महत्या करने की जानकारी दे रहे हैं,उसकी बहन मजबूत थी और वह पीटीईटी की तैयारी करने के साथ ऑनलाइन व्यापार करके आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास में जुटी होने के साथ बीमार सास की भी बेहतरीन सेवा करती थी।

लिखित शिकायत पर भी जांच नहीं 
मृतका गीता के भाई नत्थूसिंह उर्फ नवीन राजपुरोहित ने बताया कि 16 अप्रैल को ही उन्होंने लिखित में शिकायत पुलिस को दी लेकिन प्रभावी जांच शुरू नहीं की। बाद में उच्च अधिकारियों को शिकायत करने पर मुकदमा दर्ज किया। लेकिन कार्रवाई अभी तक भी नहीं की। उन्होने कहा कि न तो पुलिस ने गीता के पीहर पक्ष के बयान लिए और नहीं 23 दिन बाद भी कोई गिरफ्तारी की। जबकि संबंधित थाना क्षेत्र के सेशन कोर्ट में आरोपी अर्जुनसिंह की अग्रिम जमानत भी खारीज हो चुकी है।

निष्पक्ष जांच की मांग 
गीता के परिजनों ने गुजरात सरकार,केन्द्र सरकार से इस प्रकरण की जांच सीबीआई या निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराने की मांग की। मोबाइल काल रिकार्डिग, चैट,वीडियो मेडिकल रिकार्ड और डायरी की फॉरेसिंक जांच करवाई जाएं। परिवार की ओर से गीता की मौत के जिम्मेदार कारणों के दस्तावेजों को इलेक्ट्रोनिक साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया जाएं।