होम्योपैथी में शोध एवं साक्ष्य की अहमियतता पर मंथन

  • विश्व होम्योपैथी सप्ताह
  • तृतीय दिवस विविध शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन

जोधपुर,होम्योपैथी में शोध एवं साक्ष्य की अहमियतता पर मंथन। डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के संघटक यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ होम्योपैथी में विश्व होम्योपैथी सप्ताह के तीसरे दिन विविध शैक्षणिक व शोधपरक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य होम्योपैथी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं शोध के महत्व को रेखांकित करना था।

इस अवसर पर नोडल अधिकारी प्रोफेसर डॉ गोविन्द प्रसाद गुप्ता, प्रोफेसर डॉ देवेंद्र चाहर,प्रोफेसर डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा, यूसीएच प्राचार्य प्रो.डॉ.गौरव नागर एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रो.डॉ.गौरी शर्मा सहित महाविद्यालय के विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही।

दोपहर सत्र में “होम्योपैथी में शोध एवं साक्ष्य का महत्व” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रोफेसर (डॉ) गोविन्द प्रसाद गुप्ता (विभागाध्यक्ष,रोग एवं विकृति विज्ञान) ने की। पैनल चर्चा में सह-अध्यक्ष प्रो.(डॉ) गौरव नागर,(विभागाध्यक्ष मटेरिया मेडिका विभाग,यूसीएच),प्रो.डॉ.देवेंद्र सिंह चाहर (विभागाध्यक्ष,मौलिक सिद्धांत विभाग, पीजीआईए),प्रो.(डॉ) दिनेश चन्द्र शर्मा (पीजी विभाग,क्रिया शरीर, पीजीआईए),प्रोफेसर डॉ यशस्वी (विभागाध्यक्ष,होम्योपैथिक रिपर्टरी विभाग,यूसीएच),प्रो.डॉ वृषाली बराबदे (एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, एनाटॉमी विभाग, यूसीएच) एवं डॉ.मनाली त्यागी (एसोसिएट प्रोफेसर,मटेरिया मेडिका विभाग,यूसीएच) ने विशेषज्ञ सदस्य के रूप में सहभागिता करते हुए अपने विचार व्यक्त किए।

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पैनल डिस्कशन के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ.गोविन्द प्रसाद गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथी को वैज्ञानिक आधार पर सुदृढ़ करने,शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा साक्ष्य- आधारित चिकित्सा पद्धति को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। इस समग्र कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को होम्योपैथी के आधुनिक दृष्टिकोण,शोध पद्धति एवं साक्ष्य-आधारित चिकित्सा के विभिन्न आयामों की गहन जानकारी प्राप्त हुई।

पैनल चर्चा एवं अतिथि व्याख्यानों ने विद्यार्थियों की क्लीनिकल समझ को सुदृढ़ करते हुए उनके शैक्षणिक दृष्टिकोण को नई दिशा प्रदान की। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को शोध कार्यों के प्रति प्रेरित किया तथा भविष्य में गुणवत्ता पूर्ण एवं प्रभावी चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान करने के लिए मार्गदर्शन दिया।