अविलम्ब ड्यूटी ज्वॉइन और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने देने का हाईकोर्ट का अहम आदेश
राजस्थान हाइकोर्ट
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),अविलम्ब ड्यूटी ज्वॉइन और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने देने का हाईकोर्ट का अहम आदेश।राजस्थान उच्च न्यायालय ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज,जयपुर में सहायक प्रोफ़ेसर,पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रो लॉजी पद पर अविलम्ब ड्यूटी ज्वॉइन करवाने और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने देने के हाईकोर्ट ने दिए अहम आदेश जारी किए।
पिछले 15 वर्षों से राजधानी जयपुर में बच्चों के सबसे बड़े राजकीय जेके लोन अस्पताल (सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर) में पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट नियुक्त नहीं है। बच्चों की आंतों की बीमारी का इलाज़ चल रहा है, लिवर के डॉक्टर-पीडियाट्रिक हेपेटॉलजिस्ट के भरोसे चल रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पैरवी की। हाइकोर्ट जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने रिट याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए नियुक्ति आदेश निरस्त करने के आदेश पर रोक लगाते हुए दिये अहम अंतरिम आदेश दिए।
याचिकाकर्ता डॉ.लक्ष्मण सिंह चारण की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने रिट याचिका दायर कर बताया कि राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2010 में सहायक प्रोफ़ेसर,पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी का एक पद सृजित किया गया था,जो राज्य की राजधानी स्थित एसएमएस मेडिकल कॉलेज,जयपुर के अधीन स्वीकृत किया गया,जो आज दिन तक रिक्त पड़ा है और वर्तमान में एनएमसी/एनएमसी,नई दिल्ली द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण के दृष्टिगत चिकित्सक शिक्षकों/फैकल्टीज की कर्मीपूर्ति दिखाने के लिहाज़ से राज्य सरकार द्वारा सरकारी मेडिकल कॉलेजो में रिक्त पड़े सहायक प्रोफ़ेसर पदों को भरने के लिए दिशा निर्देश 27 अप्रैल 2025 जारी किए गए। उसी अनुरूप सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज,जयपुर द्वारा विभिन्न विभागों में सहायक प्रोफ़ेसर (सुपर स्पेशियलिटी) के रिक्त 27 पदों को यूटीबी आधार पर भरने के लिए विज्ञप्ति 13 नवंबर 2025 जारी की गई।
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याचिकाकर्ता ने सहायक प्रोफ़ेसर, पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी के एकल विज्ञापित पद के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत किया। साक्षात्कार पश्चात प्रधानाचार्य,सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज,जयपुर ने कुल 27 पदों के विरुद्ध केवल 7 अभ्यर्थियों को ही योग्य पाया और उन्हें सम्बन्धित सुपर स्पेशियलिटी में सहायक प्रोफ़ेसर पद के लिए नियुक्ति के लिए राज्य सरकार को अनुशंसा भेज दी। जिसकी पालना में राज्य सरकार के शासन उप सचिव,चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 02 दिसम्बर 2025 को नियुक्ति आदेश भी जारी कर दिया।
उक्त आदेश की पालना में याचिका कर्ता के अलावा अन्य छह अभ्यर्थियों को तो ज्वॉइन करवा दिया गया लेकिन सहायक प्रोफ़ेसर, पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी के एकल विज्ञापित पद पर चयनित याचिकाकर्ता का चयन होना विभाग के शासन संयुक्त सचिव को उचित नहीं लगा और पिछले 15 वर्षों से रिक्त पड़े सहायक प्रोफ़ेसर पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी पर याचिकाकर्ता के नियुक्ति आदेश को,बिना किसी उचित कारण का उल्लेख किए,निरस्त करने का तुगलकी आदेश जारी कर दिया, जिसे लेकर रिट याचिका दायर की गईं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता खिलेरी ने बताया कि वर्तमान में राजस्थान राज्य में केवल चार ही पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉक्टर हैं और सरकारी मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी में सुपर स्पेशियलिटी कोर्स किया हुआ याचिकाकर्ता ही एक मात्र सेवारत अभ्यर्थी है। याचिकाकर्ता की ओर से न्यूज़ पेपर में छपे ख़बर की ओर भी न्यायालय का ध्यान आकर्षित करवाया कि राजधानी जयपुर में बच्चों के सबसे बड़े राजकीय जेके लोन अस्पताल में बच्चों की आंतों की बीमारी का इलाज लिवर के डॉक्टर के भरोसे चल रहा है और 15 साल से पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी में सहायक प्रोफ़ेसर (सुपर स्पेशियलिटी) पद ख़ाली पड़ा है। अन्य विभागों में याचिकाकर्ता के साथ नियुक्त हुए अन्य सुपर स्पेशियलिटी के सहायक प्रोफ़ेसर को तो ज्वॉइन करवा दिया गया लेकिन याचिकाकर्ता के साथ भेदभाव वाला बर्ताव किया गया है।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई करने एवं रिकॉर्ड का अनुशीलन करने और अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने पीडियाट्रिक गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफ़ेसर (सुपर स्पेशियलिटी) पद पर याचिकाकर्ता के नियुक्ति आदेश रद्द करने के आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ता को अविलम्ब ड्यूटी ज्वॉइन करवाने और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने देने के आदेश देते हुए राज्य सरकार, चिकित्सा शिक्षा विभाग सचिव सहित अन्य को जवाब तलब किया। अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद नियत की।
