चैत्र नवरात्र में नीम कोंपल का सेवन लाभकारी

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),चैत्र नवरात्र में नीम कोंपल का सेवन लाभकारी। चैत्र मास के नवरात्र में व्रत उपवास के अलावा एक अन्य काम भी करना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है। इस समय नीम के ऊपर भूरे लाल रंग की नई कोंपले आती हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए और शरीर के लिए बहुत ही उपयोगी है।

चैत्री नवरात्रि के नौ दिन यदि इन नीम की कोंपलों का उपयोग किया जाए तो खून साफ होता है,इम्युनिटी बढ़ती है और बहुत तरह के बुखार या तो आते नहीं हैं और आते भी हैं तो उनका प्रभाव बहुत काम रहता है। इसीलिए नीम की पत्ती नव वर्ष के जितने भी उत्सव होते हैं,उसमें जरूर रखी जाती है। विशेष रूप से जो महाराष्ट्र और कर्नाटक में गुड़ी पड़वा पर्व होता है,इस समय उसमें नीम की नई पत्तियों को पूजा में स्थान दिया जाता है,जो यह दर्शाता है कि इन पत्तियों का कितना महत्व है।

इसे हमारे आयुर्वेद में भी बताया गया है जो इस प्रकार है।
पारिभद्रस्य पत्राणि कोमलानि विशेषत:।
सुपुष्पाणि समानीय चूर्णंकृत्वा विधानत: ।
मरीचिं लवणं हिंगु जीरणेण संयुतम्।
अजमोदयुतं कुत्वा भक्षयेद्रोगशान्तये।

नीम के कच्चे कोमल पत्ते,पुष्प, काली मिर्च,नमक,हींग,जीरा,मिश्री और अजवाइन मिलाकर चूर्ण बनाकर नवरात्र में सेवन करने से रक्तविकार आदि शारीरिक रोग शांत रहते हैं और संपूर्ण वर्ष रोग से मुक्त होकर स्वस्थ रहते हैं।

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एक बात जरूर ध्यान रखनी चाहिए़ कि इन कोंपलों का प्रयोग 10 दिन से ज्यादा न करें यानि ये औषधि है, लगातार प्रयोग से शरीर या तो इन्हें आहार समझ लेता है और फिर कोई असर नहीं होता या शरीर में कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इसलिए इसे औषधि के रूप में सेवन करना चाहिए।

-अरुण के शर्मा
जैविक कृषि वैज्ञानिक