5 पटरियों के नीचे डाले 36 भारी बॉक्स

  • फाटक-100 पर खत्म होगा घंटों का इंतजार
  • मेड़ता रोड समपार फाटक संख्या-100 पर राह हुई अब सुगम

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),5 पटरियों के नीचे डाले 36 भारी बॉक्स। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर-फुलेरा रेलमार्ग पर स्थित मेड़ता रोड रेलवे स्टेशन के यार्ड में रविवार सुबह से देर तक चले साढ़े बारह घंटे के मेगा ब्लॉक में रेलवे ने बड़ा इंजीनियरिंग रिकॉर्ड बनाया। वहां समपार फाटक संख्या-100 पर पांच मुख्य रेल लाइनों के नीचे 36 विशाल आरसीसी बॉक्स सेगमेंट सफलता पूर्वक लॉन्च कर सड़क नीचे पुल(आरयूबी) का ढांचा तैयार कर दिया गया।

सुबह 8 बजे शुरू हुआ यह महा-अभियान रात 8.30 बजे पूरा हुआ। काम खत्म होते ही ट्रैक फिटनेस देकर अप-डाउन रेल यातायात बहाल कर दिया गया और पहली मालगाड़ी को 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफलता पूर्वक निकाला गया।

जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि समपार फाटक-100 बंद प्रायः था। इससे स्कूल बसों,एंबुलेंस और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था अथवा घूम कर आना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि आरयूबी बनने के बाद फाटक बंद होने की समस्या खत्म होगी और सड़क व रेल यातायात दोनों को बड़ी राहत मिलेगी।

ऐसे चला 12 घंटे का हाईटेक ऑपरेशन
मंडल इंजीनियर (पूर्व) श्रीचंद पूनिया के अनुसार ब्लॉक लेते ही सबसे पहले ओएचई की बिजली बंद की गई। इसके बाद पांचों लाइनों की पटरियां और स्लीपर हटाए गए। चार सौ टन क्षमता वाली क्रेन की मदद से 28-28 टन वजनी 36 आरसीसी बॉक्स एक- एक कर निर्धारित स्थान पर सरकाए गए।

रेलवे ने कब्जे के आरोप नकारे,कहा जनसुविधा के लिए बनाया मार्ग

मिट्टी धंसने और पानी के रिसाव को रोकने के लिए बॉक्स जॉइंट्स को कंक्रीट कैनवास और 6 एमएम लोहे की प्लेटों से सील किया गया। सुरक्षा के तौर पर करीब दो हजार रेत की बोरियां भी लगाई गईं। लॉन्चिंग पूरी होने के बाद बैलास्ट हॉपर से गिट्टी डाली गई और टेम्परिंग मशीन से ट्रैक को लेवल किया गया।

एक ही ब्लॉक में पूरे किए 7 बड़े काम
रेलवे ने मेगा ब्लॉक का उपयोग करते हुए एक साथ सात बड़े इंजीनियरिंग कार्य भी पूरे किए। अधिकारियों के अनुसार सामान्य स्थिति में इन कार्यों के लिए अलग-अलग कई ब्लॉक लेने पड़ते,जिससे रेल यातायात लंबे समय तक प्रभावित रहता।

रेलवे को करोड़ों की बचत
रेलवे के अनुसार संयुक्त योजना के जरिए समय बचाने के साथ करोड़ों रुपए की बचत भी हुई। पूरे अभियान में तीन सौ से अधिक रेलकर्मी,3 क्रेन,4 पोकलेन मशीन और 12 डंपर लगाए गए।

तीन-चार महीने में शुरू होगा आवागमन
अब आरयूबी पर स्लैब, एप्रोच रोड और ड्रेनेज कार्य किया जाएगा। रेलवे का प्रयास है कि अगले दो महीने में यह पुल आमजन के लिए खोल दिया जाएगा,जिससे नागौर, डेगाना और मेड़ता सिटी क्षेत्र के सड़क यातायात को सीधा लाभ मिलेगा।