शारदीय नवरात्रा 11 अक्टूबर से
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा,घोड़े पर करेंगी विदाई
जोधपुर(दूरदृष्टिन्यूज), शारदीय नवरात्रा 11 अक्टूबर से। शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि इस बार विशेष संयोग के साथ आ रहा है। शारदीय नवरात्रा को मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आएंगी और घोड़े पर विदा होंगी। पंचांग के अनुसार नवरात्रि का आरंभ रविवार 11 अक्टूबर से होगा और सोमवार 19 अक्टूबर को महानवमी पर समापन होगा। 20 अक्टूबर को विजय दशमी दशहरा मनाया जाएगा।
9 दिन होगी देवी की नौ स्वरूपों की आराधना
इन नौ दिन नवरात्रा में श्रद्धालु मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी,चंद्रघंटा, कूष्मांडा,स्कंदमाता, कात्यायनी,कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विधि-विधान से पूजा करेंगे। व्रत,घट स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ,हवन और कन्या पूजन होगा।
एसे तय होता है माता का वाहन?
देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्रि का वाहन सप्ताह के वार से तय होता है। जो इस प्रकार है।
-रविवार और सोमवार को हाथी
-मंगलवार और शनिवार को घोड़ा
-बुधवार को नाव
-गुरुवार और शुक्रवार को पालकी
इस शारदीय नवरात्रा के पहले दिन 11 अक्टूबर को रविवार है,इसलिए आगमन हाथी पर और 19 अक्टूबर को सोमवार है,इसलिए प्रस्थान घोड़े पर माना जा रहा है।
हाथी पर आगमन का यह संकेत होता है
शास्त्रों के अनुसार हाथी को शक्ति,धैर्य,स्थिरता और वैभव का प्रतीक माना गया है। देवी का हाथी पर आगमन अति शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार इससे वर्ष भर अच्छी वर्षा होगी, अन्न-धन की वृद्धि होगी, समाज में सुख-शांति और स्थिरता बनी रहेगी। यह समृद्धि और ऐश्वर्य का संकेत है।
घोड़े पर प्रस्थान का यह संकेत माना जाता है
घोड़ा गति,ऊर्जा,युद्ध और सत्ता परिवर्तन का प्रतीक है। देवी का घोड़े पर जाना तेज गति से बदलाव,सक्रियता और सतर्कता का संकेत देता है। पंडितों के अनुसार यह संकेत देता है कि आने वाले समय में देश-दुनिया में बड़े और तेज फैसले होंगे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार वाहन का फल प्रतीकात्मक है,यह निश्चित भविष्यवाणी नहीं,बल्कि आस्था और परंपरा का हिस्सा है।
