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भारत के संविधान की प्रस्तावना व मूल कर्त्तव्य विषयक संगोष्ठी आयोजित

जोधपुर,राजकीय कन्या महाविद्यालय, मगरा पूंजला में बुधवार को राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के अवसर पर “भारत के संविधान की प्रस्तावना एवं मूल कर्त्तव्य” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ.चुनाराम सुथार ने अपने उद्बोधन में भारत के संविधान की प्रस्तावना में उल्लेखित प्रमुख शब्दों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रस्तावना संविधान की आत्मा है जिसमें संविधान के आदर्शों,उद्देश्यों तथा सरकार के स्वरूप का उल्लेख किया गया है। मूल कर्त्तव्यों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए डॉ.सुथार ने बताया कि मूल कर्त्तव्य नागरिकों में राष्ट्र प्रेम, सेवा, सहयोग,त्याग,बलिदान और अनुशासन की भावना पैदा करते हैं।

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प्राचार्य डॉ.उषा चौहान ने विधिक जानकारियों एवं अधिकारों का दैनिक जीवन में महत्त्व बताया। डॉ.राजेन्द्र बारहठ ने राजस्थानी में संविधान की उद्देशिका का पठन करते हुए कर्तव्य बोध पर कविता प्रस्तुत की। संगोष्ठी में महाविद्यालय की विद्यार्थी कौशल्या, चंचल सांखला,शोभा गहलोत और दिव्या देवड़ा ने अपने विचार व्यक्त किए। संकाय सदस्य डॉ.बीएल भादू सहित बड़ी संख्या में छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। डॉ.अंशुल दाधीच ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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