शोधकार्यों को प्रकाशित किया जाना समय की आवश्यकता-प्रो.सावरीकर

  • आयुर्वेद विश्वविद्यालय में छःदिवसीय शोध पत्र लेखन विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू
  • विशेषज्ञों का शोध पत्र लेखन की वैज्ञानिक विधियों पर व्याख्यान

जोधपुर,शोधकार्यों को प्रकाशित किया जाना समय की आवश्यकता-प्रो.सावरीकर। शोधपत्र लेखन एवं प्रकाशन के लिए शोध अध्येताओं को शोधपत्र लेखन पद्धति के वैज्ञानिक नियमों का ज्ञान होना आवश्यक है।यह बात सोमवार को गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय जामनगर के पूर्व कुलपति प्रो.एसएस सावरीकर ने कही।

प्रो.सावरीकर सोमवार को जोधपुर के डा.सर्वपल्ली राधा कृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केन्द्र के तत्वावधान में शोधपत्र लेखन विषय पर छह दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के शुभारम्भ पर बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे। उन्होने कहा कि शोधपत्र लेखन के समय शोधकर्त्ता लेखक को शोधविषय के ज्ञान के साथ साथ शोधपत्र लिखने के समस्त प्रोटोकॉल का भी ज्ञान होना चाहिये। प्रो.सावरीकर ने कहा कि आयुर्वेद के शोधपत्र आज दुनिया के श्रेष्ठ शोध जर्नल्स में प्रकाशित हो रहे हैं जिससे आयुर्वेद का ज्ञान विश्व में प्रतिष्ठा प्राप्त कर रहा है।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो.(वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने संभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शोधपत्र लिखने के लिए शोधकर्त्ता को विषय को सारगर्भित करते हुए डाटा,विमर्श एवं निष्कर्ष का स्पष्ट भाषा में निरूपण करना चाहिये।बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञ डॉ. रोहित शर्मा ने अपने प्रजेन्टेशन में शोधकार्य के प्रकाशन के विभिन्न चरणों एवं प्रोटोकॉल के बारे में प्रचलित वैज्ञानिक सिद्धान्तों के बारे में विस्तार से बताया। पीजीआईए प्राचार्य प्रो.महेन्द्र शर्मा ने भी इस अवसर पर उद्बोधन दिया। मानव संसाधन विकास केन्द्र के निदेशक एवं इस कार्यशाला के आयोजन अध्यक्ष डॉ.राकेश कुमार शर्मा ने स्वागत भाषण करते हुए बताया कि छह दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में विख्यात आयुर्वेदज्ञ एवं गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय जामनगर पूर्व कुलपति प्रो.एसएस सावरीकर,अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली के रिसर्च एडवाइजर डा.अनिल कुमार,बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ.रोहित शर्मा एवं आईआईटी जोधपुर में बायो साइंसेज एंड बायो इंजीनियरिंग विभाग की प्रो.सुष्मिता झा द्वारा विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में शोधपत्र लेखन एवं प्रकाशन विधि विषयक विभिन्न पहलूओं पर अतिथि व्याख्यान आयोजित किये जा रह हैं।

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कार्यक्रम में डॉ.हेमन्त कुमार आयोजन सचिव,डॉ.रवि प्रताप सिंह आयोजन सहसचिव,डॉ. रमेश कॉस्वा और डॉ हेमेन्द्र वर्मा,आयोजन समन्वयक का सहयोग रहा। कार्यक्रम में पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद के प्राचार्य निदेशक प्रो.महेन्द्र शर्मा,पूर्व प्राचार्य प्रो.गोविन्द शुक्ला, डीन रिसर्च प्रो.प्रेम प्रकाश व्यास,डीन एकेडमिक प्रो.राजेश शर्मा,परीक्षा नियंत्रक डा.राजाराम अग्रवाल, चिकित्सालय अधीक्षक प्रो.प्रमोद मिश्रा,शल्य तंत्र विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश गुप्ता,द्रव्यगुण विभागाध्यक्ष प्रो. चन्दन सिंह,रोग निदान विभागाध्यक्ष प्रो.गोविन्द गुप्ता,पंचकर्म विभागाध्यक्ष डा.ज्ञानप्रकाश शर्मा,मौलिक सिद्धान्त विभागाध्यक्ष डा.देवेन्द्र चाहर,अगद तंत्र विभाग विभागाध्यक्ष डा.रितु कपुर,होम्योपेथी प्राचार्य डा.गौरव नागर सहित बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के आयुर्वेद,होम्योपैथी एवं योग एवं नैचुरोपैथी महाविद्यालयों के शिक्षक सहित स्नातकोत्तर तथा पीएचडी अध्येता उपस्थित थे। संचालन आयोजन सचिव डा.मनीषा गोयल एवं सहसचिव डा.हेमन्त राजपुरोहित ने किया। स्नातकोत्तर अध्येता डा.धमेन्द्र,डा.संजय,डा. हेमन्त,डा.जागृति, डा.साक्षी ने सहयोग किया। धन्यवाद आयोजन सचिव डा. मनीषा गोयल ने ज्ञापित किया।

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कार्यक्रम स्थल सुश्रुत सभागार पर स्नातकोत्तर कायचिकित्सा विभाग की ओर से विभागाध्यक्ष प्रो.प्रमोद कुमार मिश्रा के नेतृत्व में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस -2023 समारोह के अन्तर्गत मासपर्यन्त आयोजित हो रहे कार्यक्रमों की कड़ी में पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन कार्यशाला के अतिथियों के साथ कुलपति प्रो. प्रजापति ने किया।

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