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सृजनशीलता में प्रक्रिया का ज़्यादा महत्व

जोधपुर, सोमवार शाम को ‘इनसाइट’ नामक आर्टिस्ट टॉक ईस्टर्न फाउंडेशन के द्वारा आयोजित किया गया। आर्ट टॉक में जयपुर के युवा कवि व चित्रकार, अमित कल्ला और बेंगलुरु के वरिष्ट चित्रकार वेनुगोपाल वक्ता के रूप में शामिल हुए। सर्वप्रथम वेनुगोपाल ने अपने 60 से अधिक पेंटिंग व लघु वृत्तचित्र का वर्णन किया। इन चित्रों में उन्होंने अपने कलात्मक यात्रा व शहरीकरण को विभिन्न तरीकों से दर्शाया। उन्होंने कला की तरकीबों का भी वर्णन किया। अमित कल्ला ने चित्रकला के सौंदर्य शास्त्र पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने भारतीय कला की महानता के बारे में बताते हुए कोणार्क सूर्य मंदिर, अजंता, एल्लोरा और राजस्थान की विभिन्न कलाकृतियों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा की सृजनशीलता में प्रक्रिया सबसे आहम भूमिका निभाती है। इसके बिना कलात्मक सृष्टि असंभव है।

चित्रकार प्रदीप्त दास ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों व गणमान्य प्रतिनिधियों का धन्यवाद करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। इस आर्ट टॉक में बहुत से विशिष्ट कलाकारों व कला प्रेमियों ने भाग लिया। उनमें यूएसए के डॉ शेल्डन हर्स्ट, मनोज संधा, यतीश कासरगोड, केशव वरनोति, टीकम खंडप्पा, आर्यप्रज्ञा बासबदुत्ता, किशोर नायक, देबदत्त साहू, स्वाति जैन, सलोनी भोजानी, रुपेश ननयाह, अनुश्री भौमिक, दिव्या राठौर, वी राजगोपाल, पबित्र दत्ता, कामिनीकान्त स्वाईं भी शामिल थे। सभी ने इस कार्यक्रम की प्रशंसा की। कार्यक्रम का संचालन डॉ नीरजा चांदना पीटर्स ने किया।

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