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जोधपुर, शहर में कोरोना के कारण छायी सुदीर्घ ख़ामोशी को तोड़ते हुए साहित्यिक संस्था कवि मित्र समूह ने कोविड दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सिवान्ची गेट गड्ढी स्थित स्वामी कृष्णानंद सभागार में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। शहर के बीस से ज्यादा कवियों ने अपनी विविधरंगी रचनाओं से माहौल को एक बार फिर सामान्य करते हुए शाम को ख़ुशनुमा बना दिया। संस्था के अध्यक्ष शैलेन्द्र ढढ्ढा ने बताया कि गोष्ठी के प्रारंभिक दौर में नकुल दवे की रचना रात की ख़ामोशी छा जाती है जब दिल में..के साथ.. बहुत से ख़्वाब इकट्ठे किए मै‌ने खिलौनों के साथ (विजय परिहार),अधूरा हो के ख़ूबसूरत है तो अधूरा ही रहने दो(शेखर देथा), तुम कहते हो मुहब्बत है,क्या वाक ई है( रेखा घनश्याम गौड़),सिरहाने पर अपने क़िताब रखती हूं(सारा शारदा),तुम्हारा नाम होंठो पे यहां गीता के रहता है(डॉ गीतान्जलि व्यास),मैं रेत हूं,बिखरूंगी ही बिखरूंगी( चंचल चौधरी),अज़ान भी सुनते है और आरती भी(अरमान जोधपुरी) की रचनाओं ने समां बांध दिया।


इसके बाद शुरु हुए दौर में रज़ा मोहम्मद की ग़जल,कोई इधर तो कोई उधर ना आशना निकला,फ़ानी जोधपुरी ने आख़री रस्म निभाने की उसको बहुत जल्दी थी, प्रमोद सिंघल ने हर तरफ़ नज़र आता है,ज़माने का लहुलुहान चेहरा सुनाकर वाहवाही लूटी। डाॅ. सुनील माथुर ने बदलते दौर में हाइटेक हो गया इश्क भी.. सुनाकर श्रोताओं को आज के दौर से रुबरू करवाया। श्याम गुप्ता ‘शांत’ने बाहर मंज़र हरा भरा,मन में भी हरियाली’ में देश के हालातों को रेखांकित किया।दुनिया वालो मैं इक क़िताब लिखूंगा ग़ज़ल सुनाकर अशफाक अहमद फौजदार ने सशक्त अभिव्यक्ति से सबको वाह वाह करने पर मजबूर कर दिया। दीपा परिहार ने दौलत उनकी लाखों की पर,रिश्तों की भी क़ीमत है सुनाकर समाज और रिश्तों पर प्रहार किया। छगनराज राव ने मंज़र भी देश में आया कहीं नज़र,मेरे मन से निकले काव्य साधना के स्वर सुनाई।
गोष्ठी के अंतिम‌ पड़ाव पर प्रमोद वैष्णव ने अपनी रचना अच्छा हुआ जानवरों ने नहीं सीखा,थाली में खाना सुनाई। सरे ख़्यालों को दबाते हुए शब गुज़री है असरार साब और काव्यगोष्ठी के अंतिम‌ कवि के रूप में डाॅ. साजिद निसार ने जिनका तकलीफ़ में बचपन पूरा गुजरा हो,वक़्त आने पर वो शख़्स सोने सा खरा होगा सुनाकर गरिमामयी समापन किया। गोष्ठी के अंत में कोरोनकाल में हमसे बिछड़े देश के साहित्यकारों को दो मिनिट का मौन रख कर श्रद्धान्जलि दी गई। संस्था के सचिव प्रमोद वैष्णव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर गोष्ठी की व्यवस्था को संभालने के साथ मोहनदास वैष्णव”रूक्मे”ने अपनी रचनाएं भी सुनाई।

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