कुंवर चंद्रप्रकाश के काव्य में सत्यम शिवम सुंदरम के भाव-डॉ.कौशल

कुंवर चंद्रप्रकाश के काव्य में सत्यम शिवम सुंदरम के भाव-डॉ.कौशल

जोधपुर,कुंवर चंद्रप्रकाश के काव्य में सत्यम शिवम सुंदरम के भाव-डॉ. कौशल। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा महाकवि कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में महाकवि कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह का साहित्यिक अवदान विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि पद्मभूषण डॉ.नारायण सिंह माणकलाव ने कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह के जीवन की कुछ अज्ञात बातों को साझा करते हुए उनकी सहृदय रचनाकार के इतर दबंग छवि को उजागर करते हुए विद्यार्थी काल में प्राप्त उनके सानिध्य के लिए स्वयं को भाग्यशाली बताया। इससे पहले हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. महिपाल सिंह राठौड़ ने स्वागत उद्बोधन में कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह को हिंदी विभाग की उन्नायक परम्परा को पोषित करने वाले अग्रदूत बताया। डॉ. फताराम नायक ने अपने उद्बोधन में नवगीत परम्परा और कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह विषयक शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए कवि को नवगीत के समृद्ध हस्ताक्षर बताया।

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कार्यक्रम में कला एवं समाज विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रोफेसर डॉ. सरोज कौशल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुंवर चंद्रप्रकाश के काव्य में सत्यम शिवम सुंदरम के भाव को रेखांकित करते हुए उनकी कविताओं में तत्सम शब्दावली तथा नूतन शब्दों के सहज गढ़ाव को उजागर किया। उन्होंने कहा कि कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह का काव्य सत्यम शिवम सुंदरम के भाव से परिपूर्ण है। शोधार्थी श्रीराम चौधरी ने कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह के काव्य में राष्ट्रीय चेतना एवं समाज सुधार के स्वर तथा सूरज मल कुम्हार ने ग्रामीण परिवेश और प्रकृति के कवि कुंवर चंद्रप्रकाश सिंह विषय पर पत्रवाचन किया। पूर्व में अतिथियों ने मां सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया। संचालन डॉ.मीता सोलंकी ने किया। कार्यक्रम में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. किशोरी लाल रैगर,डॉ.कुलदीप सिंह मीणा,डॉ.विनिता चौहान,डॉ.श्रवण कुमार,डॉ. कामिनी ओझा,डॉ.प्रवीण चंद,डॉ.महेंद्र सिंह,डॉ.कमल चौधरी तथा हिंदी विभाग के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। डॉ.प्रेम सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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