सिंदूर खेला और दर्पण विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा अनुष्ठान संपन्न

नम आंखों से बंगाली समाज की महिलाओं ने मां दुर्गा को दी विदाई -इको फ्रेंडली प्रतिमा का विसर्जन

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),सिंदूर खेला और दर्पण विसर्जन के साथ दुर्गा पूजा अनुष्ठान संपन्न। बंगाली समाज की ओर से कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड के सेक्टर 9 स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव का समापन बुधवार को पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और भावुक विदाई के साथ हुआ।

कोलकाता से आए पंडित शिबू मिश्रा ने विधि- विधान से पूजा-अर्चना संपन्न करवाई। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला में भाग लेकर मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा। बंगाली समाज के प्रवक्ता सुमन विश्वास ने बताया कि बुधवार को सुबह दशमी पूजा, पुष्पांजलि और दोपहर में दर्पण विसर्जन का आयोजन किया गया।

दर्पण विसर्जन की परंपरा में मां दुर्गा के मुख को दर्पण में देखकर धार्मिक विधि संपन्न की जाती है। इसके बाद देवी बोरोन और विसर्जन कार्यक्रम हुआ। सिंदूर खेला के दौरान बंगाली समाज की महिलाओं ने सफेद और लाल किनारी वाली साडिय़ां पहनकर मां दुर्गा को विदाई दी। महिलाओं ने पान के पत्तों से देवी का वरण किया और उनके गालों पर सिंदूर लगाकर आशीर्वाद लिया। मां को लगाए गए सिंदूर को महिलाओं ने एक-दूसरे को भी लगाया तथा अपने सुहाग की रक्षा और सदैव सौभाग्यवती रहने की कामना की।

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इस दौरान महिलाओं की आंखें नम थीं,लेकिन मां दुर्गा को मुस्कुराहट के साथ विदा करने की परंपरा भी निभाई गई। मान्यता के अनुसार, बंगाली समाज मां दुर्गा को बेटी के रूप में पूजता है। जिस प्रकार बेटी अपने मायके आती है और परिवार उसका स्नेहपूर्वक स्वागत करता है, उसी भाव से मां दुर्गा और उनके परिवार की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के बाद मां अपने परिवार के साथ कैलाश लौटती हैं, इसलिए उन्हें भावुक मन से विदाई दी जाती है।

धुनुची नृत्य और ढाक की थाप पर हुई आरती पूजा के दौरान महिलाओं ने धुनुची नृत्य किया और बंगाल के प्रसिद्ध ढाक की थाप पर मां दुर्गा की आरती उतारी। महिलाओं ने मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश,माता लक्ष्मी,माता सरस्वती और भगवान कार्तिकेय का भी पूजन किया। आरती के बाद एक-दूसरे को मिठाई खिलाई गई और शांति जल ग्रहण किया गया। सिंदूर खेला में बंगाली समाज की महिलाओं के साथ अन्य महिलाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

उम्मेद सागर में किया प्रतिमा का विसर्जन विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मां दुर्गा की पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा सहित भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाओं का उम्मेद सागर जलाशय में विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान मां दुर्गा के जयकारों और उल्लू ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर और मिठाई खिलाकर दुर्गा उत्सव की खुशियां साझा कीं। विसर्जन के बाद समाजबंधुओं ने सामूहिक स्नेह मिलन किया और शांति जल ग्रहण कर कार्यक्रम का समापन किया।