बहुभाषी काव्य कौथिक में डॉ. कुसुम भट्ट सम्मानित
नई दिल्ली(दूरदृष्टीन्यूज),बहुभाषी काव्य कौथिक में डॉ.कुसुम भट्ट सम्मानित। देश की राजधानी नई दिल्ली में रविवार को शब्द शिल्पियों का समागम हुआ। मासिक साहित्यिक संगोष्ठी नाम से जगमोहन सिंह रावत(जगमोरा)की साहित्यिक परिकल्पना संस्था ने यह आयोजन किया था। बहुभाषी- (हिंदी,नेपाली,गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी) कवि सम्मेलन में सौ से अधिक साहित्यकारों को आमंत्रित किया गया था।उत्तराखंड की संस्कृति से लकदक, जगमोहन सिंह रावत ने पज़ल (औखाण) विधा को गढ़वाली भाषा में एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी है। अब तक वे 1174 पज़ल लिख चुके हैं। उन्हें साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में पजलकार के रूप में ख्याति प्राप्त है। वे खांटी गढ़वाली शब्दों की डिक्स्नरी हैं।
मासिक साहित्यिक संगोष्ठी (दिल्ली) का यह प्रथम वार्षिकोत्सव था। इस आयोजन में 170 से अधिक साहित्य प्रेमियों ने उपस्थिति दी,जिसमें कुछ नाम हैं डॉ.हरेंद्र असवाल,रमेश चंद्र घिल्डियाल ‘सरस’,डॉ सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’,डॉ.वीरेंद्र सिंह नेगी, पार्थसारथि थपलियाल,गणेश खुगसाल “गणी”,अजय सिंह बिष्ट, जबर सिंह कैंतुरा,उदय ममगाईं राठी,उनीता सच्चिदानंद (धस्माना), कमला रावत, भगवती प्रसाद जुयाल “गढ़देशी”,डॉ कसुम भट्ट,ओम ध्यानी,रंजना नौटियाल, आशा खंडूड़ी,खजान चंद शर्मा,राम सिंह तोमर,पूनम तोमर,प्रमिला तोमर, ओम प्रकाश आर्य,दिनेश ध्यानी,डॉ.पृथ्वी सिंह केदारखंडी,निर्मला नेगी,सुनील रमेश थपलियाल ‘घंजीर’,डॉ.हेमा जोशी हिमाद्रि, पयाश पोखड़ा,सतेसिंह रावत,आशा खंडूड़ी,पंत “मीतबंधु”,हेमबाबु लेखक, प्रजापति नेगी, रामेश्वरी नादान,सुशीला रावत, खुशहाल सिंह बिष्ट,सुबोध भारद्वाज,दर्शन सिंह रावत,जय सिंह रावत, जयपाल सिंह रावत,दीवान सिंह नेगी,संदीप गढ़वाली,वीरेंद्र जुयाल ‘उपिरि’,सुभाष गुसाईं,बादल बाजपुरी, नीरज बवाड़ी.. सहित साहित्यकारों का निर्मल तारामंडल दृश्यमान था।
केंद्रीय संचार ब्यूरो एवं पत्र सूचना अपर महानिदेशक ऋतु शुक्ला सम्मानित
आरंभ में संस्था के वरिष्ठ सदस्य डॉ. सुशील बुड़ाकोटी ने आमंत्रित कवियों और श्रोताओं का वाणी- सम्मान किया। उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा मांगल गीत को स्वर दिये पुष्पा कवासी,सुशीला बिष्ट और राजेश्वरी पंवार ने। इस आयोजन में डॉ.कुसुम भट्ट को विभिन्न विषयों में अपने साहित्यिक योगदान के लिए साहित्य सम्मान से अलंकृत किया गया। डॉ.कुसुम भट्ट ने सम्मान स्वीकार किया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी एक रचना जागर गीत शैली में प्रस्तुति की। गणेश खुगसाल “गणी” जिन्होंने कुसुम के बाल्यकाल से उनकी प्रतिभा को पल्लवित पुष्पित होते देखी है,उन्होंने अपनी स्नेहिल अभिव्यक्ति और शुभकामनाएं दी।
इस आयोजन में डॉ.हेमा जोशी “हिमाद्रि”का कथा संग्रह “कंडाली धूप” का विमोचन भी किया गया। जगमोहन सिंह रावत सांस्कृतिक परंपराओं के पक्षधर हैं। इस कवि सम्मेलन का शुभारंभ पंचमेवा,भेली और रोट काटने तथा पंच प्रसाद बांटने के साथ हुआ।हिंदी,गढ़वाली, कुमाऊनी, जौनसारी और नेपाली भाषी कवि समागम में बेहतरीन कविताएं सुनने का यह सुअवसर था। नेपाल से आये कवियों ने हिमालयी भाषाओं में नेपाली कविताएं प्रस्तुत की। अधिकतर कवि युवा पीढ़ी के थे,जिन्होंने रूढ़ि से हटकर कविताएं प्रस्तुत की। नारी प्रतिभाओं ने भी अपनी पारंपरिक शैली में आधुनिकता और सामाजिक परिवेश को अलंकृत शब्दों में चित्रित किया। उपस्थित सभी लोगों ने आयोजन को सफल बताया।
– रिपोर्ट-पार्थसारथि थपलियाल
