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तीन दिवसीय लोकानुरंजन मेले की रंगारंग शुरुआत

  • लोक कला महाकुम्भ में नौ राज्यों के लगभग 900 कलाकार दे रहे हैं प्रस्तुति
  • संभागीय आयुक्त ने विशाल नगाड़ा बजा कर किया शुभारंभ
  • राजस्थान संगीत नाटक अकादमी का तीन दिवसीय आयोजन

जोधपुर(डीडीन्यूज),तीन दिवसीय लोकानुरंजन मेले की रंगारंग शुरुआत। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर का तीन दिवसीय लोकानुरंजन मेला रविवार सायं जयनारायण व्यास स्मृति भवन(टाउनहॉल) में शुरू हुआ। 25 मार्च तक चलने वाले इस मेले का शुभारंभ संभागीय आयुक्त और संगीत नाटक अकादमी की प्रशासक डॉ प्रतिभा सिंह ने विशाल नगाड़ा बजा कर किया।

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संभागीय आयुक्त डॉ प्रतिभा सिंह मेले के प्रत्येक कलाकार के मंच तक जाकर उनकी कला को नजदीक से देखा परखा और उनकी तारीफ की। इस मौके पर उनके साथ विभिन्न प्रदेश के लोक कलाकारों ने फोटो खिंचवा कर जोधपुर की अपनी स्मृति को यादगार बनाया।

इस अवसर पर संभागीय आयुक्त डॉ प्रतिभा सिंह ने कहा कि 23 से 25 मार्च तक चलने वाले यह लोकानुरंजन मेला एक तरह से कल्चरल एक्सचेंज है जिसमें एक दूसरे राज्यों लोक संस्कृति, परंपराएं और लोकनृत्य नजदीक से देखने, सीखने का मौका मिलता है। यहां उत्तराखंड,कश्मीर,गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा,उत्तर प्रदेश,पंजाब आदि राज्यों के लोक कलाकार अपनी लोक कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरा यह मानना है कि इस तरह की कला का प्रदर्शन होने से लुप्त हो रही कला को संजोया जा सकता है।

अकादमी सचिव अजीत सिंह राजावत ने बताया कि लोक कला के इस महाकुम्भ में देश के नौ राज्यों के लगभग 900 कलाकार अपनी परम्परागत लोक कलाओं से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं। शाम पांच बजे टाउनहॉल के प्रांगण में विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से सूर्यनगरी के दर्शकों का मनमोह लिया। टाउनहॉल प्रांगण में मुख्य द्वार पर और छवि गृह के द्वार पर अहसान की शहनाई और पुष्कर के कैलाश की टीम के नगाड़ों की सुमधुर ध्वनि कानों में मिठास घोल रही थी।

यहां बूंदी के शंकर की कच्छी घोड़ी नृत्य,गोपाल धानुक की टीम का सहरिया नृत्य, दिलीप विजय का बंब वादन, पाबूजी की पड़, तेरहताली,राधा अजमेर की टीम का घूमर नृत्य,ममता देवी का चकरी नृत्य, यूसुफ खान मेवाती की टीम का भपंग वादन,जोधपुर के प्रेमाराम व सुरेश भाट का कठपुतली नृत्य, कमल किशोर का जादू,रुपनाथ की टीम का कालबेलिया नृत्य,भवाई नृत्य, ऊकाराम परिहार की बालोतरा की आंगी गेर,धौलपुर के अरुण कुमार के करतब, जेफू खान लंगा की टीम की खनकती आवाज का गायन,सुगना राम का भोपाभोपी नृत्य,श्यामाराम का तीन ढोल वादन का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। प्रांगण में घूम रहे रावण का किरदार,बड़े मुखौटे बच्चों में विशेष प्रभाव डालने में कामयाब रहे।

लोकानुरंजन मेले की दूसरी कड़ी में शाम साढ़े सात बजे से टाउनहॉल के छविगृह में विभिन्न प्रदेश के लोक कलाकारों ने बेहतरीन प्रस्तुति से दर्शकों को रोमांचित कर दिया। जेफु खान लंगा गायन से शुरू हुए इस लोकानुरंजन शाम को राजस्थान, उत्तराखंड,कश्मीर, गुजरात,मध्य प्रदेश,महाराष्ट्र,हरियाणा,उत्तर प्रदेश,पंजाब की लोक कला का दिग्दर्शन करवाया।

यह आयोजन पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र,उदयपुर,उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र,प्रयागराज,उतर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र पटियाला, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी चंडीगढ तथा हरियाणा कला परिषद कुरूक्षेत्र के सहयोग से आयोजित हो रहा है। कार्यक्रम में प्रवेश निःशुल्क था।

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